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मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग तीर्थस्थल Omkareshwar Jyotirlinga में एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर चिंता बढ़ गई है। ओंकारेश्वर और ममलेश्वर को जोड़ने वाले झूला पुल की एक लोहे की रॉड टूट जाने के बाद प्रशासन ने एहतियातन श्रद्धालुओं का आवागमन बंद कर दिया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलों और अन्य संरचनाओं का नियमित रखरखाव नहीं होने के कारण इस तरह की घटनाएं बार-बार सामने आती हैं। साथ ही बढ़ती भीड़ को नियंत्रित करने के लिए भी कोई स्थायी और प्रभावी योजना नजर नहीं आती।
ओंकारेश्वर में हादसों का इतिहास भी चिंता बढ़ाता है। वर्ष 1993 में सोमवती अमावस्या के दौरान झूला पुल पर भगदड़ मचने से कई श्रद्धालुओं की मौत हुई थी। इसके अलावा फरवरी 2023 में भी इसी झूला पुल का एक महत्वपूर्ण तार टूट गया था, जिसके बाद आवागमन रोकना पड़ा था। हर घटना के बाद जांच और सुधार के दावे किए जाते हैं, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि जांच रिपोर्टें सार्वजनिक नहीं होतीं और समस्याएं ज्यों की त्यों बनी रहती हैं।
सिर्फ पुल ही नहीं, नर्मदा नदी में संचालित नावों की सुरक्षा भी बड़ा मुद्दा है। नदी की अधिक गहराई और भारी श्रद्धालु दबाव के कारण यहां कई बार नाव दुर्घटनाएं और डूबने की घटनाएं हो चुकी हैं। आगामी सावन माह और भविष्य में होने वाले बड़े धार्मिक आयोजनों को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि ओंकारेश्वर में आधारभूत ढांचे की मजबूती, भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा मानकों की व्यापक समीक्षा जरूरी है, ताकि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और भविष्य में किसी बड़े हादसे से बचा जा सके।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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