राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में बड़ा एक्शन: सीएम योगी के दौरे से पहले चंपत राय को प्रशासन की 'नो-एंट्री' की सलाह
अयोध्या के भव्य राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान में करोड़ों रुपये की कथित चोरी और वित्तीय अनियमितता के आरोपों ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अयोध्या दौरे से ठीक पहले स्थानीय जिला प्रशासन ने एक अभूतपूर्व कदम उठाया है। प्रशासन और जिलाधिकारी (DM) ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को मुख्यमंत्री के स्वागत और पूजा-अर्चना के कार्यक्रम से दूर रहने की सख्त सलाह दी है। आमतौर पर सभी वीआईपी मेहमानों की अगवानी करने वाले चंपत राय से कहा गया है कि वे खुद आने के बजाय अपना कोई प्रतिनिधि भेजें, ताकि मुख्यमंत्री की सुरक्षा और गरिमा बनी रहे।
इस महाघोटाले के सामने आने के बाद सरकार द्वारा गठित तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) पूरी मुस्तैदी से मामले की तह तक जाने में जुटा हुआ है। जांच टीम ने अब तक मंदिर ट्रस्ट के कार्यालय पहुंचकर चंपत राय, व्यवस्थापक गोपाल राव और उनके करीबियों सहित करीब 70 से अधिक संदिग्धों से कड़े सवाल-जवाब किए हैं। एसआईटी की इस ताबड़तोड़ कार्रवाई के परिणामस्वरूप संदिग्धों के ठिकानों से अब तक लगभग 2 से 3 करोड़ रुपये की भारी-भरकम नकदी बरामद की जा चुकी है। सीसीटीवी फुटेज खंगालने के साथ-साथ दानपात्रों से पैसे निकालने और उनकी गिनती करने वाले कर्मचारियों की भूमिका की भी बारीकी से जांच हो रही है।
इस संवेदनशील मुद्दे ने उत्तर प्रदेश की सियासत में भी भारी उबाल ला दिया है, जहां विपक्ष लगातार सरकार की घेराबंदी कर रहा है। समाजवादी पार्टी समेत विपक्षी दलों ने इसे करोड़ों सनातनी श्रद्धालुओं की आस्था पर बहुत बड़ा आघात बताते हुए पूरे मामले की अदालत की निगरानी में निष्पक्ष जांच की मांग की है। वहीं दूसरी ओर, मामले के लगातार तूल पकड़ने के बाद प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने भी इस पूरे प्रकरण पर ट्रस्ट से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। इलाहाबाद हाई कोर्ट में भी इस घोटाले की सीबीआई (CBI) जांच और कैग (CAG) ऑडिट कराने के लिए जनहित याचिका दायर की जा चुकी है, जिससे ट्रस्ट के पदाधिकारियों पर दबाव बेहद बढ़ गया है।