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देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की रफ्तार फिलहाल धीमी पड़ गई है, जिससे करीब 40 प्रतिशत क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। मौसम विभाग के अनुसार, सैटेलाइट तस्वीरों में राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और कर्नाटक के बड़े हिस्सों में बादल नदारद दिख रहे हैं। 723 जिलों में से केवल 103 जिलों में ही सामान्य बारिश हुई है, जबकि बंगाल की खाड़ी में मजबूत लो-प्रेशर सिस्टम नहीं बनने से मानसून की प्रगति प्रभावित हुई है।
मानसून 4 जून को केरल पहुंचने के बाद 13 दिनों में 19 राज्यों तक फैल चुका है, लेकिन तेलंगाना के भद्राचलम क्षेत्र में पिछले एक सप्ताह से इसकी गति थमी हुई है। इसके कारण छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में बारिश में देरी हो रही है। मौसम विभाग ने 18 और 19 जून को बिहार, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय, सिक्किम, राजस्थान और मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में बारिश, तेज हवाओं और कुछ स्थानों पर भारी वर्षा की संभावना जताई है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, मानसून के आगे बढ़ने में जेट स्ट्रीम की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। जेट स्ट्रीम के कमजोर पड़ने पर मानसूनी हवाएं सक्रिय होंगी और अगले चार से पांच दिनों में महाराष्ट्र, कर्नाटक, छत्तीसगढ़ तथा अन्य क्षेत्रों में मानसून के आगे बढ़ने के लिए अनुकूल परिस्थितियां बन सकती हैं। इससे देश के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियों में तेजी आने की उम्मीद है।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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