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देश की सीमाओं और महत्वपूर्ण रणनीतिक ठिकानों पर संभावित ड्रोन हमलों के खतरे को देखते हुए केंद्र सरकार ने सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, जहाज और जलमार्ग मंत्रालय के समुद्री सुरक्षा विंग ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि बदलते वैश्विक सुरक्षा हालात में दुश्मन ड्रोन देश के अहम ठिकानों और बुनियादी ढांचे को निशाना बना सकते हैं। इसी कारण सीमावर्ती और समुद्री क्षेत्रों में एंटी-ड्रोन सिस्टम लगाने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
ड्रोन खतरे से निपटने के लिए गृह मंत्रालय ने सीमा सुरक्षा बल (BSF) के तहत एक विशेष समिति का गठन किया है, जो भारत के लिए उपयुक्त एंटी-ड्रोन तकनीकों का परीक्षण और मूल्यांकन करेगी। वहीं, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) ने भी DRDO, IB, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) और BSF के अधिकारियों के साथ एक संयुक्त टीम बनाई है। यह टीम देश के महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों का दौरा कर सुरक्षा जरूरतों का आकलन करेगी और रिपोर्ट के आधार पर तय किया जाएगा कि किस स्थान पर कौन सा एंटी-ड्रोन सिस्टम लगाया जाए।
देश की इस सुरक्षा रणनीति के तहत तमिलनाडु के थूथुकुडी स्थित वी.ओ. चिदंबरनार पोर्ट में फरवरी 2026 में अत्याधुनिक एंटी-ड्रोन सिस्टम स्थापित किया गया है, जो ऐसा करने वाला भारत का पहला बंदरगाह बन गया है। रेडियो फ्रीक्वेंसी और रडार आधारित यह प्रणाली 360 डिग्री निगरानी करने के साथ संदिग्ध ड्रोन की पहचान और उन्हें जाम करने में सक्षम है। सरकार का मानना है कि इस तरह की आधुनिक तकनीकें देश की हवाई और समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने के साथ भविष्य के सुरक्षा खतरों से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
Patrakar Vandana Singh
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