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भारत में कभी बेकार समझा जाने वाला एगेव कैक्टस अब किसानों के लिए कमाई का नया जरिया बनता जा रहा है। आंध्र प्रदेश के कांदुकुर क्षेत्र में किसान पहले इसे खेतों की बाड़ के रूप में इस्तेमाल करते थे, लेकिन अब यही पौधा एगेव आधारित स्पिरिट उद्योग का महत्वपूर्ण कच्चा माल बन गया है। एगेव पौधा मेक्सिको की प्रसिद्ध टकीला और मेजकल इंडस्ट्री की रीढ़ माना जाता है, जिसका बाजार करीब 1.4 लाख करोड़ रुपये का है। भारत में भी कई डिस्टिलरीज किसानों से एगेव खरीद रही हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में इसकी मांग तेजी से बढ़ी है।
एगेव की खेती आसान नहीं मानी जाती। इसके ‘पीना’ नामक केंद्रीय भाग में शुगर जमा होती है, जो स्पिरिट निर्माण के लिए सबसे महत्वपूर्ण होती है। किसानों को पौधे को फूल आने से पहले काटना पड़ता है, क्योंकि उसके बाद शुगर ऊपर तने में चली जाती है और गुणवत्ता प्रभावित हो जाती है। कटाई के बाद 24 घंटे के भीतर प्रसंस्करण भी जरूरी होता है, ताकि शुगर खराब न हो। इसी वजह से एगेव उत्पादन में सही समय और तकनीकी जानकारी बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
विशेषज्ञों के अनुसार भारत में एगेव आधारित पेय पदार्थों का बाजार तेजी से बढ़ रहा है और इसकी वार्षिक वृद्धि दर लगभग 31 प्रतिशत आंकी जा रही है। कर्नाटक, महाराष्ट्र, राजस्थान और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में एगेव की उपलब्धता भविष्य में बड़े उद्योग का आधार बन सकती है। हालांकि गुणवत्ता और शुगर की मात्रा में एकरूपता की चुनौती अभी भी बनी हुई है। इसके बावजूद डेक्कन क्षेत्र की विशाल भूमि और अनुकूल जलवायु को देखते हुए माना जा रहा है कि आने वाले वर्षों में भारत एगेव उत्पादन और उससे जुड़े उद्योग में वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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