Advertisement
मध्य प्रदेश से राज्यसभा चुनाव लड़ रहीं कांग्रेस उम्मीदवार Meenakshi Natarajan का नामांकन पत्र रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा खारिज किए जाने के बाद मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। भाजपा उम्मीदवार Mahesh Kewat की शिकायत पर आरोप लगाया गया कि नटराजन ने अपने चुनावी हलफनामे में तेलंगाना की एक अदालत से जुड़े लंबित मामले की जानकारी नहीं दी। इसी आधार पर उनका नामांकन निरस्त कर दिया गया।
कांग्रेस और मीनाक्षी नटराजन ने इस कार्रवाई को अनुचित बताते हुए कहा है कि उनके खिलाफ न तो कोई एफआईआर दर्ज है, न चार्जशीट दाखिल हुई है और न ही किसी अदालत ने मामले का संज्ञान लिया है। उनका कहना है कि ऐसी स्थिति में हलफनामे में उस मामले का उल्लेख करना अनिवार्य नहीं था। कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि नामांकन रद्द करने से पहले उम्मीदवार को अपना पक्ष रखने या त्रुटि सुधारने का अवसर नहीं दिया गया, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।
सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति तो दी है, लेकिन फिलहाल चुनाव प्रक्रिया या परिणामों पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के प्रावधानों के अनुसार, चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद ऐसे मामलों को आमतौर पर चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद चुनाव याचिका के जरिए चुनौती दी जाती है। कांग्रेस की एकमात्र उम्मीदवार का नामांकन खारिज होने से राज्यसभा चुनाव में भाजपा की स्थिति और मजबूत होती दिखाई दे रही है, जबकि विपक्ष ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल खड़ा करने वाला कदम बताया है।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
|
All Rights Reserved ©2026 Kolar News.
Created By:
Medha Innovation & Development |