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मध्य प्रदेश के लिए राहत भरी खबर सामने आई है, जहां पिछले एक दशक में ग्राउंड वाटर की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। जल शक्ति मंत्रालय द्वारा लोकसभा में पेश आंकड़ों के अनुसार, राज्य के 82.82% निगरानी कुओं में जलस्तर बढ़ा है, जो राष्ट्रीय औसत 73.25% से काफी बेहतर है। ‘डायनामिक ग्राउंड वॉटर असेसमेंट रिपोर्ट 2025’ के मुताबिक, 1036 कुओं के विश्लेषण में से 858 कुओं में पानी बढ़ा, जिनमें लगभग 49% कुओं में 0 से 2 मीटर तक वृद्धि दर्ज की गई।
राज्य के 317 ब्लॉकों में से 221 ब्लॉक ‘सुरक्षित’ श्रेणी में हैं, जो दर्शाता है कि यहां जल पुनर्भरण बेहतर हो रहा है। वहीं 64 ब्लॉक अर्ध-गंभीर, 6 गंभीर और 26 अति-दोहित श्रेणी में हैं। इस सुधार के पीछे अटल भूजल योजना, अमृत सरोवर निर्माण और जल शक्ति अभियान जैसे प्रयासों की बड़ी भूमिका रही है। लाखों जल संरक्षण कार्यों और आधुनिक सिंचाई तकनीकों ने भूजल स्तर को बढ़ाने में मदद की है।
जहां एक ओर जलस्तर में सुधार हुआ है, वहीं पानी की गुणवत्ता चिंता का विषय बन रही है। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के 55 में से 39 जिलों में भूजल में नाइट्रेट की मात्रा अधिक पाई गई है, जिससे स्वास्थ्य जोखिम बढ़ सकता है। इसका मुख्य कारण कृषि में रासायनिक उर्वरकों का अत्यधिक उपयोग और सीवेज प्रबंधन की कमी माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अब जल संरक्षण के साथ-साथ पानी की गुणवत्ता सुधार पर भी उतना ही ध्यान देना जरूरी है।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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