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मकर संक्रांति के मौके पर शहर में भिक्षुकों की संख्या बढ़ने की आशंका के चलते जिला प्रशासन सतर्क हो गया है। कलेक्टर ने सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि बाहरी राज्यों से आने वाले भिक्षुकों पर नजर रखी जाए और यह पता लगाया जाए कि वे किन मार्गों से शहर में प्रवेश कर रहे हैं। दान के पर्व और सर्दी के बीच भिक्षुकों की गतिविधियों में बढ़ोतरी के चलते प्रशासन ने रोकथाम के साथ-साथ पुनर्वास के व्यापक अभियान की भी शुरुआत की है।
महिला एवं बाल विकास विभाग और अन्य विभागों की संयुक्त टीमें मंदिरों, बाजारों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में लगातार अभियान चला रही हैं। नाबालिग भिक्षुकों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पिछले साल चलाए गए अभियान में 3,000 से अधिक भिक्षुकों को पकड़ा गया और कई को पुनर्वास केंद्रों में भेजा गया। लगभग 1,100 लोगों को आजीविका, कौशल प्रशिक्षण और रोजगार कार्यक्रमों से जोड़कर भिक्षावृत्ति की ओर लौटने से रोका गया।
अभियान के दौरान करीब 500 नाबालिग भिक्षुकों की पहचान की गई, जिनमें से 200 से अधिक बच्चों को स्कूल, बाल भवन और आश्रय गृहों में भेजा गया, जबकि 50 से ज्यादा बच्चों को उनके परिवारों से मिलाया गया। देवगुराड़िया, अन्नपूर्णा, बिजासन और पितृ पर्वत जैसे मंदिरों के आसपास सबसे अधिक बाल भिक्षुक देखे जा रहे हैं। प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे भिक्षा न दें और रेस्क्यू अभियान में सहयोग करें, ताकि शहर स्थायी रूप से भिक्षुक मुक्त बनाया जा सके।
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