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समृद्ध भारत में योगदान के आह्वान के साथ प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भरता पर दिया बल
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नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को 79वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में सामर्थ्य और आत्मनिर्भरता को आपस में जोड़ते हुए विकसित भारत की ओर बढ़ने के लिए एकजुट प्रयास का आह्वान किया। अपने संबोधन में उन्होंने दीपावली पर नेक्स्ट जेनरेशन जीएसटी रिफॉर्म, जनसांख्यिकी की बदलाव से निपटने के लिए डेमोग्राफिक मिशन, रक्षा क्षेत्र से जुड़े सुदर्शन चक्र मिशन जैसी बड़ी घोषणाएं की।

 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने 12वें स्वतंत्रता दिवस संबोधन में कई घोषणाएं कीं। इनमें स्पष्ट संदेश था कि भारत अपनी शर्तों पर भविष्य गढ़ेगा, अपना भाग्य स्वयं तय करेगा और 2047 तक विकसित राष्ट्र बनेगा। प्रधानमंत्री ने लाल किले से दिए संबोधन में घोषणा की कि सरकार दीपावली के अवसर पर नेक्स्ट जेनरेशन जीएसटी रिफॉर्म लागू करेगी। एक उच्चस्तरीय समिति द्वारा समीक्षा के बाद तय किए गए इन सुधारों के तहत सामान्य नागरिक से जुड़े करों में उल्लेखनीय कमी की जाएगी। इससे रोजमर्रा की वस्तुएं सस्ती होंगी और एमएसएमई क्षेत्र को लाभ मिलेगा।

 

प्रधानमंत्री ने 79वें स्वतंत्रता दिवस पर आत्मनिर्भरता, तकनीकी शक्ति एवं समावेशी विकास का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी तकनीक-प्रधान है और जो देश तकनीक में आगे हैं, वे ही सफलता प्राप्त कर रहे हैं। इसी दिशा में भारत सेमीकंडक्टर क्षेत्र में मिशन मोड में कार्य कर रहा है और वर्ष के अंत तक ‘मेड इन इंडिया’ चिप बाजार में उपलब्ध होगी। ऊर्जा क्षेत्र में भी भारत सौर, हाइड्रोजन और परमाणु स्रोतों में आत्मनिर्भर बनने के प्रयास कर रहा है।

 

प्रधानमंत्री ने ‘नेशनल डीप वॉटर एक्सप्लोरेशन मिशन’ और ‘नेशनल क्रिटिकल मिशन’ की घोषणा की, जिनका उद्देश्य समुद्र में तेल-गैस भंडार और 1,200 से अधिक स्थलों पर महत्वपूर्ण खनिजों की खोज है। यह रणनीतिक कदम तकनीकी, रक्षा और ऊर्जा क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि सुरक्षा के लिए ‘मिशन सुदर्शन चक्र’ शुरू किया जाएगा, जो अत्याधुनिक हथियार प्रणाली विकसित करेगा। देशभर के सामरिक, नागरिक और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा के लिए नवीनतम तकनीकी उपकरण लगाए जाएंगे।

 

सीमावर्ती क्षेत्रों में जनसांख्यिकीय बदलाव पर चिंता व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री ने ‘हाई पावर डेमोग्राफी मिशन’ की घोषणा की, जिससे घुसपैठ और जनसंख्या असंतुलन की चुनौती से निपटा जाएगा। 

 

प्रधानमंत्री ने “वोकल फॉर लोकल” पहल के तहत नागरिकों और दुकानदारों से भारत में निर्मित वस्तुओं को अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि स्वदेशी गर्व और ताकत से प्रेरित होना चाहिए, न कि मजबूरी से। इसके लिए दुकानों के बाहर “स्वदेशी” बोर्ड लगाने जैसी पहल करने का सुझाव दिया, जिससे आत्मनिर्भरता को बढ़ावा, उद्यमिता को समर्थन और भारत की आर्थिक-औद्योगिक नींव मजबूत हो।

 

प्रधानमंत्री ने ‘रिफॉर्म टास्क फोर्स’ बनाने की घोषणा की। टास्क फोर्स का लक्ष्य आर्थिक वृद्धि में तेजी, लालफीताशाही में कमी, शासन का आधुनिकीकरण और 2047 तक 10 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था की तैयारी है। प्रधानमंत्री ने यह बताया कि भारत ने अपना 2030 का 50 प्रतिशत स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्य 2025 में ही हासिल कर लिया है। उन्होंने मिशन ग्रीन हाइड्रोजन, नए सौर और जल ऊर्जा संयंत्रों तथा 10 नए परमाणु रिएक्टरों के ज़रिए 2047 तक परमाणु ऊर्जा में दस गुना वृद्धि का रोडमैप साझा किया।

 

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में आज से एक लाख करोड़ रूपये की योजना शुरू करने की घोषणा की। योजना के तहत नए नियोजित युवाओं को प्रतिमाह 15,000 रूपये सहायता दी जाएगी। इस योजना का लाभ तीन करोड़ युवाओं को मिलेगा, जो स्वतंत्र भारत से समृद्ध भारत की ओर पुल का कार्य करेगी।

 

प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत के बजट का बड़ा हिस्सा पेट्रोल, डीज़ल और गैस आयात पर खर्च होता है। उन्होंने ‘नेशनल डीपवॉटर एक्सप्लोरेशन मिशन’ की शुरुआत की घोषणा की, जो समुद्री संसाधनों के दोहन के साथ सौर, हाइड्रोजन, जल और परमाणु ऊर्जा में बड़े विस्तार का मार्ग प्रशस्त करेगा। 

 

प्रधानमंत्री ने कहा कि जैसे कोविड-19 के दौरान भारत ने वैक्सीन बनाई और डिजिटल भुगतान के लिए यूपीआई विकसित किया, वैसे ही अब हमें अपने जेट इंजन भी बनाने होंगे। उन्होंने वैज्ञानिकों और युवाओं से इसे राष्ट्रीय चुनौती के रूप में स्वीकार करने का आह्वान किया।

 

प्रधानमंत्री ने “मिशन सुदर्शन चक्र” की घोषणा की, जिसका उद्देश्य शत्रु रक्षा तंत्र में सेंधमारी को निष्प्रभावी करना और भारत की आक्रामक क्षमताओं को सुदृढ़ करना है। इसे श्रीकृष्ण के सुदर्शन चक्र से जोड़ते हुए उन्होंने बताया कि भारत अपनी सांस्कृतिक और पौराणिक विरासत से प्रेरणा लेकर आधुनिक रक्षा नवाचार को दिशा देता है। यह मिशन रणनीतिक स्वायत्तता का प्रतीक है, जो किसी भी खतरे का तेज, सटीक और शक्तिशाली जवाब सुनिश्चित करेगा।

 

प्रधानमंत्री ने स्टार्टअप, एमएसएमई और उद्यमियों के लिए अनुपालन लागत घटाने और पुराने कानूनी प्रावधानों के भय से मुक्ति देने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि इसके लिए ‘नेक्स्ट जनरेशन रिफॉर्म्स टास्क फोर्स’ बनाई जाएगी, जो सभी आर्थिक कानूनों और प्रक्रियाओं की समयबद्ध समीक्षा करेगी।

 

उन्होंने अपने संबोधन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष पूर्ण होने पर संगठन और उसके स्वयंसेवकों को आदरपूर्वक नमन किया। उन्होंने कहा कि संघ ने व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण के संकल्प तक मां भारती के कल्याण का लक्ष्य लेकर मातृभूमि को जीवन समर्पित किया है।

 

प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले वर्षों में उनकी सरकार ने ऐतिहासिक सुधारों की लहर चलाई है। 40 हजार से अधिक अनावश्यक अनुपालन समाप्त किए गए, 1,500 से अधिक पुराने कानून निरस्त हुए और दर्जनों कानून संसद में सरल बनाए गए। हालिया सत्र में ही 280 से अधिक प्रावधान हटाकर शासन को सरल और नागरिकों के लिए सुलभ बनाया गया। उन्होंने कहा कि सुधार केवल आर्थिक विषय नहीं, बल्कि नागरिकों के रोजमर्रा के जीवन को बदलने का माध्यम हैं।

 

प्रधानमंत्री ने आयकर सुधार, फेसलेस असेसमेंट, 12 लाख रूपये तक की वार्षिक आय पर शून्य कर और पुराने आपराधिक कानूनों को भारतीय न्याय संहिता से बदलने को प्रमुख उपलब्धियां बताया। उन्होंने कहा कि इनसे पारदर्शिता, दक्षता और न्यायिक प्रक्रियाओं में सरलता आई है। प्रधानमंत्री ने इस स्वतंत्रता दिवस को “140 करोड़ संकल्पों का पर्व” बताते हुए कहा कि यह सिर्फ राष्ट्रीय उत्सव नहीं, बल्कि देशवासियों की सामूहिक उपलब्धियों और गौरव का प्रतीक है । 

 

उन्होंने संविधान निर्माताओं डॉ. भीमराव अंबेडकर, डॉ. राजेंद्र प्रसाद, जवाहरलाल नेहरू और सरदार पटेल और अन्य के योगदान को याद किया। साथ ही यह स्पष्ट किया कि संविधान सिर्फ ऐसा दस्तावेज नहीं, बल्कि देश का उज्जवल और स्थायी मार्गदर्शक है। उन्होंने श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान को याद करते हुए कहा कि वे भारत के संविधान के लिए बलिदान देने वाले पहले महापुरुष थे। उनका जीवन राष्ट्र के लिए प्रेरणा है। अनुच्छेद 370 की दीवार गिराकर, एक देश-एक संविधान के मंत्र को जब हमने साकार किया, तो हमने डॉ. मुखर्जी को सच्ची श्रद्धाजंलि दी।

 

प्रधानमंत्री ने हाल ही में सम्पन्न “ऑपरेशन सिंदूर” का उल्लेख करते हुए इस सैन्य अभियान को आधुनिक और आत्मनिर्भर रक्षा संरचना का प्रमाण बताया। उन्होंने कहा कि देश अब आतंकवादियों को समर्थन देने वालों के खिलाफ रुख कठोर रखेगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि सिंधु जल समझौते ने देश के किसानों को अकल्पनीय नुकसान पहुंचाया है और किसान हित व राष्ट्रहित में इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। 

प्रधानमंत्री ने ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला की अंतरिक्ष यात्रा का उल्लेख करते हुए बताया कि भारत अब अपना स्वयं का अंतरिक्ष स्टेशन विकसित करने की ओर बढ़ रहा है। इस क्षेत्र में 300+ स्टार्टअप सक्रिय रूप से योगदान दे रहे हैं।

 

उन्होंने बताया कि यूपीआई के माध्यम से भारत दुनिया के डिजिटल लेन-देन का लगभग आधा हिस्सा संभाल रहा है। प्रधानमंत्री ने डेटा सुरक्षा, साइबर सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डीप टेक प्लेटफॉर्म्स में स्वदेशी पहल की जरूरत पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने महिला सशक्तिकरण की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि दो करोड़ महिलाएं ‘लाखपति दीदी’ बन चुकी हैं। उन्होंने ‘ड्रोन दीदी’ जैसी पहल का भी संकेत देते हुए, ‘वोकल फॉर लोकल’ का समर्थन करते हुए स्वदेशी उत्पादों के उपयोग पर जोर दिया।

 

प्रधानमंत्री ने इस बात को रेखांकित किया कि भारत ने दूध, दाल और जूट में शीर्ष स्थान प्राप्त किया है। मछली उत्पादन में दूसरा स्थान हासिल किया है और चावल, गेहूं, फल-सब्जियों के निर्यात में भी मजबूत स्थिति बनी हुई है। कृषि निर्यात 4 लाख करोड़ रूपये तक पहुंच चुका है। प्रधानमंत्री ने जनधन, आयुष्मान, आवास, सड़क जैसे योजनाओं के ज़रिए 25 करोड़ गरीबों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति में सुधार लाने का दावा किया।

 

प्रधानमंत्री ने कहा कि समृद्धि का मार्ग सुरक्षा से होकर गुजरता है। पिछले 11 वर्षों में राष्ट्र और नागरिक सुरक्षा पर समर्पण से काम किया गया है। नक्सलवाद से प्रभावित सवा सौ जिलों की संख्या घटाकर मात्र 20 कर दी गई है। आदिवासी क्षेत्रों में कानून और विकास का तिरंगा फहराया गया है। बस्तर जैसे इलाकों में, जो कभी बम-बंदूक की गूंज से पहचाने जाते थे, आज खेल, उत्साह और प्रगति का वातावरण है। रेड कॉरिडोर अब ग्रीन कॉरिडोर में बदल रहा है, यह परिवर्तन देश के लिए गर्व और प्रेरणा का स्रोत है।

 

सामाजिक क्षेत्र में प्रधानमंत्री ने महात्मा ज्योतिबा फुले की 200वीं जयंती पर विशेष कार्यक्रम शुरू करने की घोषणा की और उनके ‘पिछड़ों को प्राथमिकता’ के मंत्र को विकास का आधार बताया। साथ ही उन्होंने कहा कि किसानों, मछुआरों और पशुपालकों के अहित से जुड़े किसी भी प्रयास के सामने वे स्वयं खड़े हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि हम सिर्फ समाज के पिछड़े लोगों की ही चिंता नहीं कर रहे बल्कि पिछड़े क्षेत्र, जिलों और ब्लॉक क्षेत्र को भी प्राथमिकता दे रहे हैं। इसी मिशन के तहत हमने 100 आकांक्षी जिलों और 500 आकांक्षी ब्लॉकों में विकास का काम किया है।

 

प्रधानमंत्री ने कहा कि विकास में खेल का अहम योगदान है। पहले खेल को समय की बर्बादी माना जाता था, अब माता-पिता बच्चों की खेल उपलब्धियों पर गर्व करते हैं। खेल को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय खेल नीति लाई गई है, जिससे स्कूल से ओलंपिक तक इकोसिस्टम बने। उन्होंने मोटापे की बढ़ती समस्या पर चिंता जताई और घर में तेल का उपयोग 10 प्रतिशत कम करने की अपील की।

Kolar News 15 August 2025

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