कटनी । मध्य प्रदेश के कटनी शहर की कानून-व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। रविवार रात कटनी चौपाटी में हुई चाकूबाजी की एक वारदात में गायत्री नगर निवासी दो युवकों की मौत हो गई, जबकि एक अन्य युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना के बाद हमलावर मौके से फरार हो गए, जिनकी तलाश में पुलिस जुट गई है। इस वारदात ने कटनी पुलिस के 'ऑपरेशन शिकंजा', 'कांबिंग गश्त' और 'नशा मुक्ति अभियान' जैसे तमाम दावों पर पानी फेर दिया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कोतवाली थाने से महज 500 मीटर दूर स्थित चौपाटी में बीती रात करीब एक बजे यह वारदात हुई। नगर पुलिस अधीक्षक नेहा पच्चीसिया ने बताया कि सागर और तातुली नामक दो युवकों ने गायत्री नगर निवासी 23 वर्षीय रोशन सिंह (पिता गुलाब सिंह), 22 वर्षीय उत्कर्ष दुबे (पिता राजा दुबे) और 20 वर्षीय विनेश (पिता शिवनारायण) पर चाकुओं से हमला कर दिया। हमला इतना बर्बर था कि तीनों गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तुरंत शासकीय जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने कुछ ही देर बाद रोशन सिंह और उत्कर्ष दुबे को मृत घोषित कर दिया। विनेश की हालत बेहद नाजुक होने के कारण उसे प्राथमिक उपचार के बाद जबलपुर रेफर कर दिया गया है।
पुलिस के अनुसार, हमलावर सागर और तातुली अभी फरार हैं। घायलों की स्थिति इतनी गंभीर थी कि वे वारदात की वजह भी नहीं बता पाए। पुलिस ने हमलावरों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया है और उनकी तलाश जारी है। आशंका है कि जल्द ही आरोपियों को पकड़ लिया जाएगा। इस घटना ने कटनी पुलिस की चुस्त-दुरुस्त कानून व्यवस्था की पोल खोल दी है। बीते कुछ समय से शहर में लगातार हो रही आपराधिक घटनाओं ने पुलिस की सक्रियता पर बड़े सवाल खड़े किए हैं।
एक तरफ जहां पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर जिला पुलिस लोगों को नशे के प्रति जागरूक करने की शपथ दिला रही है, 'ऑपरेशन शिकंजा' के तहत मादक पदार्थों की तस्करी और बिक्री पर अंकुश लगाने की बात कर रही है, वहीं 'कांबिंग गश्त' कर बदमाशों पर नकेल कसने के दावे भी किए जा रहे हैं। लेकिन, इन सबके बावजूद शहर के मुख्य स्थानों पर बदमाशों द्वारा बेखौफ होकर चाकूबाजी जैसी वारदातों को अंजाम दिया जाना, पुलिस की इन तमाम कवायदों को व्यर्थ साबित करता दिख रहा है। अपराधियों के बढ़ते हौसले और लगातार हो रही चाकुओं की घटनाओं ने शहर में फिर से खौफ का माहौल पैदा कर दिया है। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर पुलिस कर क्या रही है और अपराधों पर नियंत्रण क्यों नहीं हो पा रहा है?