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नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ब्राजील के रियो डी जेनेरियो में आयोजित 17वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में वैश्विक शासन के ढांचे में सुधार, आतंकवाद के विरुद्ध कठोर कार्रवाई और जिम्मेदार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विकास की आवश्यकता पर बल दिया।
विदेश मंत्रालय की ओर से प्रधानमंत्री की शिखर सम्मेलन में सहभागिता पर जानकारी दी गई। प्रधानमंत्री ने उद्घाटन सत्र में वैश्विक शासन और शांति-सुरक्षा पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि विकासशील देशों को सतत विकास के लिए अधिक जलवायु वित्त और प्रौद्योगिकी की पहुंच की आवश्यकता है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, विश्व बैंक, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और डब्ल्यूटीओ जैसे संस्थानों में तत्काल सुधार की मांग की।
आतंकवाद पर चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले को मानवता पर आघात बताया। उन्होंने कहा कि आतंक को संरक्षण, वित्तपोषण या प्रोत्साहन देने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने दोहरे मानकों से बचने और आतंकवाद के विरुद्ध शून्य सहिष्णुता नीति की वकालत की।
बाद में "मल्टीलेटरलिज्म, आर्थिक-वित्तीय मामलों और एआई" सत्र में उन्होंने कहा कि विविधता और बहुध्रुवीयता ब्रिक्स की ताकत हैं। उन्होंने चार सुझाव दिए—ब्रिक्स न्यू डेवलपमेंट बैंक को दीर्घकालिक और मांग आधारित परियोजनाओं को प्राथमिकता देनी चाहिए, विज्ञान एवं अनुसंधान रिपोजिटरी स्थापित किया जाए, आवश्यक खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित बनाया जाए और एआई के क्षेत्र में नवाचार और उत्तरदायित्व को संतुलित किया जाए।
सम्मेलन के अंत में ब्रिक्स देशों ने ‘रियो डी जेनेरियो घोषणा’ को अपनाया। ‘रियो डी जनेरियो डिक्लेरेशन – स्ट्रेंग्थनिंग ग्लोबल साउथ कोऑपरेशन फॉर अ मोर इंक्लूसिव एंड सस्टेनेबल गवर्नेंस’ में विकासशील देशों के बीच सहयोग बढ़ाने, वैश्विक संस्थानों में सुधार और समावेशी तथा सतत विकास को बढ़ावा देने पर बल दिया गया है। साथ ही आतंकवाद पर कड़ा रूख अपनाया गया है।
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