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बारिश के मौसम में कोलार ,केरवा और कलियासोत के आसपास मंडराते बाघ -बाघिन के मूवमेंट पर अब केवल नजर ही नहीं रखी जाएगी, बल्कि उनके अलावा अन्य बाघों का पूरा डाटा तैयार कर सिक्योर बैंक में डाला जाएगा। इससे पता चल सकेगा कि किस समय कहां और कौन सा घाट किस एरिया में सेंसिटिव जोन में एक्टिव है। वर्तमान में केरवा, मिंडोरा क्षेत्र में बाघ 211 और बाघिन 213 का मूवमेंट 15 दिनों से बना हुआ है। भोपाल फॉरेस्ट सर्किल से जुड़े सूत्रों का कहना है कि वन विभाग द्वारा बाघ जंगल से बाहर न आए इसके लिए जंगल के अंदर वॉटर सोर्स की सुरक्षा और इलेक्ट्रिसिटी लाइन को चेक करने के निर्देश दिए हैं।
क्या-क्या होगा...
असंरक्षित क्षेत्रों में घूम रहे बाघों की पहचान कर चिन्हित करेंगे।
भोपाल के 10 बाघ शामिल होंगे।
डेटा वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट को भेजा जाएगा।
पायलट प्रोजेक्ट भोपाल में घूम रहे बाघों से होगा।
वन विभाग बाघों की ट्रैप कैमरों से पहचान कर रहा है। डीएफओ पीसी तिवारी का कहना है कि बाघों और उनके मूवमेंट का चार्ट बनाया जा रहा है ताकि पता चल सके कौन सा बाघ-बाघिन भोपाल,सीहोर मंडल में घूम रहे हैं। अभी तक टाइगर रिजर्व में घूम रहे बाघों को उनके पैरों के निशानों से पहचाना जाता है। असंरक्षित क्षेत्र के बाघों की कोई पहचान न होने से उनके न्यूमेरिक नामों में गड़बड़ हो जाती है।
केरवा ,कोलार और कलियासोत के जंगलों में बाघ और तेंदुए की गतिविधियां को मॉनिटर करने के लिए वन विभाग बाघ मित्र नामक वॉलेटिंयर भी तैयार करेगा। यह मोबाइल पर वन रक्षकों की टच में रहेंगे और गांवों में मूवमेंट की खबर देंगे। इसके लिए मंडल ने अब तक 70 वॉलेंटियर को चिह्नित किया है। शरुआत भोपाल वन मंडल से की जा रही है। फिर सीहोर और औबेदुल्लागंज में भी इस तरह के बाघ मित्र तैयार किए जाएंगे।
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