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राजधानी के शाहपुरा तालाब की हद नगर निगम एक बार फिर तय करेगा। तालाब के एफटीएल और इसके 33 मीटर के दायरे का डिफ्रेंशियल ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (डीजीपीएस) सर्वे शुरू होने रहा है। इसमें तालाब के दायरे में आने वाले निर्माणों और अवैध कब्जों का पता लगाया जाएगा। इस तकनीक से सर्वे के नतीजे सटीक आते हैं। इससे पहले तालाब के दायरे में निर्माण को लेकर जीपीएस सर्वे कराया किया गया था। इसमें एफटीएल के दायरे में 48 पक्के निर्माण सामने आए थे। इसमें आधे तोड़ दिए गए थे। बाकी का मामला कोर्ट में चला गया। निर्माण तालाब के किनारे की 8.23 एकड़ ग्रीन बेल्ट की जमीन पर हुए थे। इनमें दुकानें, मकान और अन्य निर्माण सामने आए थे। तालाब का निर्माण 1990 में हुआ था। इसका मामला एनजीटी में चल रहा है। तालाब के दायरे को लेकर 2006 में पहला सर्वे हुआ था।
यह सर्वे की नई तकनीक है। इसमें सटीक नतीजे आते हैं। जीपीएस के सर्वे में जमीनी हकीकत से औसतन 15 मीटर का अंतर आता है। जबकि डीजीपीएस तकनीक से यह अंतर 10 सेंटीमीटर रह जाता है।
तालाब के 33 मीटर के दायरे में ज्यादातर निर्माण कोलार रोड के चूनाभट्टी और शाहपुरा सी सेक्टर के पास हुए हैं। इसमें धार्मिक स्थल और झुग्गियां भी हैं। हालांकि तालाब के आसपास निर्माण को लेकर निगम कार्रवाई करता रहता है। इसके बावजूद निर्माण हुए हैं। तालाब में गंदा पानी मिलने से रोकने के लिए एसटीपी भी एनजीटी के निर्देश पर बनाया गया है।
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