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बाघों का खतरा ,नहीं हुई तार फेंसिंग
बाघों का खतरा

 

भोपाल के आबादी वाले क्षेत्रों से सटी वन सीमा पर तार फेंसिंग का काम एक बार फिर अटक गया है। बजट नहीं होने से विभाग ने हाथ खड़े कर दिए हैं। हालांकि, इसके लिए शासन से दो करोड़ रुपए की मांग जरूर की गई है, लेकिन यह नए वित्तीय वर्ष में ही मिल सकेंगे। लिहाजा, काम भी तभी शुरू होगा। ऐसे में बाघों के जंगल से बाहर आने का खतरा बना हुआ है।

वन विभाग को यह काम एक महीने पहले शुरू करना था। इसके लिए सर्वे भी कराया जा चुका है। सर्वे में आबादी से सटी वन सीमा का करीब 12 किलोमीटर का हिस्सा खुला मिला है, जहां से आए दिन बाघ बाहर निकलकर मवेशियों का शिकार कर रहे हैं। ज्ञात हो कि पीसीसीएफ मप्र वन और पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ ने भी बाघों के आबादी तक पहुंचने के संभावित खतरें को देखते हुए वन सीमा को तार फेंसिंग से कवर्ड करने के निर्देश दिए थे।

कोलार ,कलियासोत, वाल्मी से लेकर 13 शटर गेट, संस्कार वैली स्कूल और बुलमदर फार्म से सटे जंगल में लगातार बाघिन टी-123 और बाघ टी-121 का मूवमेंट रहा है। यही स्थिति रसूलिया, समसपुरा, खाकरडोल क्षेत्रों की है।

कलेक्टर निशांत वरवड़े ने टाइगर टास्क फोर्स कमेटी की बैठक में कंजरवेटर फॉरेस्ट से बाघों के जंगल से बाहर निकलने को लेकर चिंता जताई थी। तब कंजरवेटर ने बताया था जल्द तार फेंसिंग का काम शुरू करेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

कंजरवेटर फॉरेस्ट सामान्य वन मंडल  डॉ. एसपी तिवारी ने बताया आबादी से सटी 12किमी की वन सीमा में तार फेंसिंग करना था। सर्वे करा चुके हैं। बजट नहीं होने से काम शुरू नहीं हुआ है। इसके लिए शासन से दो करोड़ रुपए की मांग की है। नए वित्तीय वर्ष में यह राशि मिलेगी, तब काम शुरू होगा।

 

Kolar News 7 March 2017

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