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मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) द्वारा कलियासोत नदी के मामले में अब तक पारित सभी आदेशों के पालन पर रोक लगा दी है। साथ ही राज्य शासन, नगर निगम व टाउन एंड कंट्री प्लानिंग सहित अन्य को नोटिस जारी कर याचिकाकर्ता एलएन मेडिकल काॅलेज व जेके हॉस्पिटल के निर्माण में हस्तक्षेप नहीं करने के अादेश दिए हैं।
कलियासोत नदी के ग्रीन बेल्ट में हो रहे पर्यावरण नियमों के उल्लंघन के खिलाफ डॉ. सुभाष चंद्र पांडे ने एनजीटी में याचिका दायर की थी। लंबी सुनवाईयों के बाद एनजीटी ने नदी के 33 मीटर के दायरे में सभी प्रकार के निर्माण पर रोक लगा दी थी। इस मामले में नया मोड़ तब आया जब पिछली सुनवाई में जेके हॉस्पिटल और एलएन मेडिकल कॉलेज ने भू-राजस्व संहिता के नियमों का हवाला देकर चिह्नांकन की प्रक्रिया को ही गलत ठहराते हुए पूर्व में दिए गए आदेश की समीक्षा की गुजारिश की। शुक्रवार को हाईकोर्ट में हुई सुनवाई में एडवाेकेट सिद्धार्थ राधेलाल गुप्ता ने कलियासोत नदी के मामलों में एनजीटी के सभी आदेशों को चुनौती दी। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस राजेंद्र मेनन व जस्टिस अंजुली पालो की अदालत में उन्होंने कहा कि पूरी प्रक्रिया मेें एनजीटी ने क्षेत्राधिकार के बाहर जाकर, बिना पक्षकारों को सुने एक पक्षीय तरीके से आदेश पारित किए गए हैं।
गुप्ता ने एनजीटी में दलील दी थी कि अस्पताल और मेडिकल कॉलेज 2006 में बन चुके हैं। अब दस साल बाद आज की स्थिति के आधार पर इनके संबंध में आदेश देना सही नहीं है। उन्होंने कलियासोत नदी के 11 किमी में हुए चिह्नांकन के काम को भी गलत ठहराया था। उनकी दलील थी कि मप्र भू-राजस्व संहिता के तहत बंदोबस्त की प्रक्रिया की कार्रवाई नियमों के अनुसार नहीं की गई है। लेकिन ट्रिब्यूनल ने दलीलों खारिज कर अपने पहले के आदेशों को सही ठहराया था।
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