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कांट्रेक्टर और इंजीनियर के लिए खराब सड़कें यानि की दूध देती गाय
कोलार और कोलार को दूसरे इलाकों से जोड़ने वाली खराब सड़कें और बार-बार उनकी रिपेरिंग होना विभागों के इंजीनियरों और कांट्रेक्टर्स के लिए दूध देती गाय बन गई हैं। यही कारण है कि एक एजेंसी को सड़कें देने की मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की मंशा पर पानी फिर गया है। मुख्यमंत्री की इच्छा नगर निगम को सड़कें देने की थी ताकि एक ही विभाग की जवाबदारी तय हो, लेकिन पीडब्ल्यूडी, सीपीए सड़कें छोड़ना नहीं चाह रहे हैं। सड़कों पर यह बोर्ड भी नहीं लगाते ताकि पता चल सके यह सड़कें इनकी हैं।तिलक नगर से गुजराती कॉलोनी तक, बीमाकुंज से सर्वधर्म और कोलार तिराहे तक,मिसरोद से सलैया कोलार तक ,दानिश कुञ्ज मेन रोड ,दानिश कुञ्ज पुल से शाहपुरा तक की सड़कें बदहाल हैं।
पिछले दिनों बारिश के बाद शहर की खराब सड़कों की हालत को लेकर कलेक्टोरेट में बैठक बुलायी गयी थी। इसमें कलेक्टर निशांत वरवड़े ने कहा था कि काम करने वाली एजेंसियां जिम्मेदारी से बचती हैं। कोई यह भी बताने को तैयार नहीं कि कौन सी सड़क किसकी है और अभी क्या काम किया जा सकता है। उस समय कलेक्टर ने निर्देश दिए थे कि सभी एजेंसियां अपनी सड़कों को बनाने के बाद वहां पर बोर्ड लगाएं और उसमें एजेंसी का नाम, ठेकेदार का नाम और उसका मोबाइल नंबर भी लिखे। लेकिन किसी भी विभाग ने कलेक्टर की बात को नहीं माना।
निगम हर साल सड़कों के निर्माण और उनके रखरखाव पर 30 करोड़ रूपये खर्च करता है। जबकि राजधानी परियोजना 25 करोड़ और लोकनिर्माण विभाग 40 करोड़। अगर इतना पैसा वाकई सड़कों पर खर्च किया जाता तो भी सड़कों की हालत सुधरी नजर आ सकती थी।
PWD की बदहाल सड़कें : जिंसी से पुल बोगदा तक , मिसरोद से सलैया तक , छोला से लेकर भानपुर तक की सड़क।
नगर निगम की खराब रोड: जेके रोड , लिंक रोड पर भी कुछ स्थानों पर गड्ढे हो गए हैं, बीआरटीएस कॉरिडोर की सड़क, बरखेड़ा पठानी , हबीबगंज अंडरब्रिज, मोती मस्जिद आदि की सड़कें।
सीपीए की जर्जर सड़कें: तिलक नगर से गुजराती कॉलोनी तक, बीमाकुंज से सर्वधर्म तक, बागसेवनिया से कटारा हिल्स, 80 फीट रोड का हालत खराब पर्यावरण परिसर से लेकर बीडीए तक की सड़क।
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