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भोपाल। मध्य प्रदेश के सिवनी में गौमांस की तस्करी के मामले दो आदिवासियों की मॉब लिंचिंग मामले में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एसआइटी जांच के आदेश दिये है। इसके अलावा सिवनी एसपी को हटाने के साथ ही कुरई थाने और बादलपार चौकी के पूरे स्टाफ को भी हटाने के निर्देश दिये है। सीएम शिवराज के एक्शन पर पूर्व सीएम कमलनाथ ने प्रतिक्रिया देते हुए तंज कसा है।
कमलनाथ ने कहा कि मध्यप्रदेश के सिवनी जिले में दो आदिवासियों की हत्या के मामले में सरकार की नींद 12 दिन बाद खुली है। वह भी कांग्रेस व आदिवासी वर्ग के दबाव में यह निर्णय लिया गया है। पहले सरकार पूरे मामले में लीपा पोती में लगी रही, आरोपियों को बचाने वाले बयान जिम्मेदार देते रहे, प्रशासन को क्लीन चिट देते रहे और अब सरकार आज एसआईटी जाँच की घोषणा कर रही है..?
पूर्व सीएम ने निशाना साधते हुए कहा कि अभी भी जो घोषणा हुई है वो अधूरी है, कई जिम्मेदारों को बचा लिया गया है, दोषी अधिकारियों का निलंबन हो, एसआईटी जाँच की बजाय उच्च स्तरीय जाँच की घोषणा हो, आरोपियों का भाजपा से जुड़े संगठनो से कनेक्शन सामने आये।
कमलनाथ ने आरोप लगाते हुए कहा कि नेमावर कांड में भी इसी प्रकार सरकार सीबीआई जाँच से बचती रही और छह माह बाद सरकार ने सीबीआई जाँच की माँग मानी। पता नही क्यों शिवराज सरकार आदिवासी भाइयों की इतनी विरोधी है, वह उनको न्याय दिलाना ही नही चाहती है।
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