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आयें, मिटटी के गणेश जी बनायें, घर ले जायें
सुनीता दुबे
पर्यावरण को प्रदूषण से बचाने के लिए एप्को 1,2 और 3 सितम्बर को भोपाल के 3 स्थान पर चलित वाहन प्रशिक्षण आयोजित करेगा। प्रशिक्षण में न केवल कच्ची मिट्टी से लोग अपने हाथों से ईकों फ्रेन्डली गणेश प्रतिमा बनाना सीखेंगे बल्कि इसे अपने घर नि:शुल्क ले भी जा सकेंगे। प्रशिक्षण वाहन 1 सितम्बर को गणेश मंदिर पिपलानी, 2 सितम्बर को मंदाकिनी ग्राउण्ड कोलार रोड और 3 सितम्बर को दशहरा मैदान बिट्टन मार्केट पर शाम 5 से 7 बजे तक रहेंगें। इसके अलावा चलित प्रशिक्षण वाहन विभिन्न स्कूलों में जाकर बच्चों को भी इको फ्रेन्डली गणेश मूर्ति बनाना सिखाएंगे।
आयुक्त, पर्यावरण श्री अनुपम राजन ने बताया कि पीओपी से होने वाली हानियों से जन-सामान्य को अवगत कराने और ईको फ्रेन्डली गणेश मूर्ति के उपयोग को प्रोत्साहित करने के लिए शहर के विभिन्न स्थान पर प्रशिक्षण का आयोजन किया जा रहा है। प्राय: घरों में स्थापित की जाने वाली मूर्तियाँ पीओपी और रासायनिक रंगों से बनी होती है, जो विसर्जन पर पर्यावरण समस्याओं को जन्म देती हैं। प्रशिक्षण वाहन में कच्ची मिट्टी से आसान और रोचक तरीके से मूर्ति बनाना सिखाया जाएगा। लोग मात्र 5 मिनट में ही अपने खुद के गणेश जी बना लेंगे। विसर्जन भी घरों में ही आसानी से हो जाएगा।
पीओपी मूर्तिकारों की कार्यशाला 31 अगस्त को
एप्को द्वारा 31 अगस्त को शाम 3 से 5 बजे तक पर्यावरण परिसर ई-5, अरेरा कॉलोनी, भोपाल में पहली कार्यशाला की जा रही है। कार्यशाला में पर्यावरण परिसर के अधिकारी-कर्मचारी और पीओपी से मूर्ति बनाने वाले लोगों को आमंत्रित किया गया है। मूर्ति बनाना सिखाने के साथ ही इसमें पीओपी मूर्तिकारों को पीओपी और रासायनिक रंगों के पर्यावरण पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों की जानकारी भी दी जाएगी। कार्यशाला में आम नागरिक भी भाग ले सकते हैं।
हमारी परंपरा में नहीं है पीओपी मूर्ति पूजा
आध्यात्मिक रूप से विश्व में अपना वर्चस्व स्थापित करने वाली भारतीय संस्कृति में विसर्जन करने वाली प्रतिमाओं का निर्माण मिट्टी, गोबर, सुपारी आदि से करने की समृद्ध परंपरा है। ये वस्तुएँ जल में घुल भी जाती हैं और नदी-तालाब की तलछट को प्रदूषित भी नहीं करती। वहीं पीओपी अघुलनशील, तलछट के लिए हानिकारक और रासायनिक रंग पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए दुष्प्रभावी हैं।
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