दिनेश गर्ग
मध्यप्रदेश में 'स्कूल चलें हम' अभियान के प्रेरकों के सहयोग से शाला से बाहर बच्चों की शिक्षा एवं उनका शालाओं में ठहराव सुनिश्चित करने के लिए 'दस्तक अभियान'' चलाया जायेगा। अभियान के क्रियान्वयन के लिये सभी जिला कलेक्टर को निर्देश दिये गये हैं। निर्देशों में प्रेरकों एवं स्थानीय जन-प्रतिनिधियों के सम्मेलन के आयोजन का भी उल्लेख किया गया है।
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने स्कूल शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में शाला से बाहर बच्चों का सटीक चिन्हांकन कर उन्हें शिक्षा की मुख्य-धारा में जोड़ने के लिये प्रभावी कार्यवाही करने को कहा था। इस कार्य में 'स्कूल चलें हम अभियान'' के प्रेरकों से निरंतर सम्पर्क तथा उनके प्रोत्साहन के लिये भी उन्होंने निर्देशित किया था।
शासन को प्रतिभा-पर्व में यह देखने में आया कि डी और ई ग्रेड में प्राय: वे बच्चे शामिल हैं, जो अधिकांशत: अनुपस्थित रहते हैं। लगातार एक माह तक अनुपस्थित अथवा विगत तीन माह में 20 प्रतिशत से कम औसत उपस्थिति वाले बच्चों को भी शाला से बाहर के बच्चों की श्रेणी में रखा गया है। इसके लिये सभी कलेक्टर से जिले के प्रेरकों का सहयोग लेकर 'दस्तक अभियान'' द्वारा शाला के बाहर रहे बच्चों को शिक्षा की मुख्य-धारा से जोड़ने के लिये कहा गया है।
आवासीय विशेष प्रशिक्षण, गैर-आवासीय विशेष प्रशिक्षण तथा केन्द्रों के माध्यम से शाला से बाहर रहे अप्रवेशी तथा शाला-त्यागी बच्चों को उनकी उम्र के अनुरूप कक्षाओं में प्रवेश के लिये तैयार किया जायेगा। निर्धारित योग्यताएँ प्राप्त करने के बाद उन्हें नियमित स्कूल में लाया जायेगा।
अभियान द्वारा शालाओं में लगातार अनुपस्थित रहने वाले बच्चों को स्कूलों में नियमित उपस्थिति के लिये प्रेरित किया जायेगा, ताकि वे निर्धारित दक्षताओं की प्राप्ति शेष समयावधि में पूरी कर सकें। ऐसे बच्चों के लिये अतिरिक्त कक्षाओं का आयोजन करने के पहले से निर्देश हैं।
शाला से बाहर के विशेष आवश्यकता वाले ऐसे बच्चे, जो शाला जाने में असमर्थ हैं, उनकी शिक्षा-व्यवस्था के लिये अनेक जिला मुख्यालय पर पहले से रहवासी छात्रावास की सुविधा उपलब्ध है। इसके अलावा मोबाइल स्त्रोत सलाहकार घर पर शैक्षिक मार्गदर्शन देने का कार्य करते हैं। उनके द्वारा ऐसे बच्चों के लिये इस सुविधा का उपयोग भी सुनिश्चित किया जायेगा।
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