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भोपाल के युवाओं में इन दिनों सोशल मीडिया पर दिखाए जाने वाले 'हेल्थ हैक्स' और शॉर्टकट्स को बिना सोचे-समझे अपनाने की होड़ मची है। कोई वजन घटाने के लिए ब्लैक कॉफी में घी मिलाकर पी रहा है, तो कोई ज्यादा प्रोटीन के चक्कर में कच्चे अंडे निगल रहा है। लेकिन जर्नल ऑफ मेडिकल इंटरनेट रिसर्च के एक हालिया शोध ने इस ट्रेंड की पोल खोल दी है, जिसके अनुसार सोशल मीडिया पर स्वास्थ्य से जुड़ी करीब 87 फीसदी पोस्ट पूरी तरह भ्रामक और बिना किसी वैज्ञानिक आधार के हैं। रील्स पर दिखने वाले ये चमत्कारिक नुस्खे असल में सेहत को सुधारने के बजाय सीधे अस्पताल पहुंचाने का काम कर रहे हैं।
चिकित्सकों और विशेषज्ञों ने इस बढ़ते चलन पर गहरी चिंता जताते हुए युवाओं को आगाह किया है। भोपाल के सीएमएचओ डॉ. मनीष शर्मा के मुताबिक, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स कोई सर्टिफाइड डॉक्टर नहीं हैं और उनके बताए नींबू पानी से डिटॉक्स या एप्पल साइडर विनेगर जैसे तरीके लिवर, किडनी और पाचन तंत्र को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं। विज्ञान स्पष्ट करता है कि शरीर को डिटॉक्स करने का काम लिवर और किडनी प्राकृतिक रूप से करते हैं, न कि कोई जादुई ड्रिंक। इसलिए, किसी भी भ्रामक डिजिटल ट्रेंड का शिकार होने से पहले हमेशा प्रमाणित मेडिकल एक्सपर्ट या डाइटिशियन से सलाह लेना बेहद जरूरी है।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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