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राम मंदिर चढ़ावा चोरी से जुड़े चर्चित मामले का नाम लेकर साइबर ठग लोगों को निशाना बना रहे हैं। मध्य प्रदेश के इंदौर में कई लोगों के पास ऐसे फर्जी फोन और वीडियो कॉल पहुंच रहे हैं, जिनमें कॉल करने वाले खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी, साइबर सेल या अन्य जांच एजेंसियों का अधिकारी बताते हैं। ठग दावा करते हैं कि पीड़ित का मोबाइल नंबर, बैंक खाता या आधार कार्ड कथित जांच में सामने आया है और फिर 'डिजिटल अरेस्ट' का डर दिखाकर बैंक खाते की जानकारी, ओटीपी और पैसे ट्रांसफर कराने का प्रयास करते हैं।
हालांकि राहत की बात यह है कि इंदौर में अब तक इस तरह की ठगी का कोई मामला दर्ज नहीं हुआ है, लेकिन बढ़ते फर्जी कॉल्स को देखते हुए राज्य साइबर सेल ने एडवाइजरी जारी कर लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। अधिकारियों के मुताबिक, साइबर अपराधी अक्सर चर्चित घटनाओं का सहारा लेकर लोगों में डर पैदा करते हैं। इससे पहले भी ईडी, सीबीआई, मनी लॉन्ड्रिंग, ड्रग्स पार्सल और कोर्ट के नाम पर इसी तरह की ठगी के प्रयास सामने आ चुके हैं। साइबर सेल ने स्पष्ट किया है कि भारत में 'डिजिटल अरेस्ट' जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है और कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर पैसे जमा कराने या बैंक विवरण साझा करने के लिए नहीं कहती।
साइबर विशेषज्ञ प्रोफेसर गौरव रावल ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल या संदेश से घबराएं नहीं और उसकी सत्यता की पहले पुष्टि करें। यदि कोई व्यक्ति खुद को जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर बैंक विवरण, ओटीपी या पैसे मांगता है तो तुरंत कॉल काट दें और इसकी शिकायत साइबर हेल्पलाइन 1930 या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर करें। अधिकारियों का कहना है कि सतर्कता और सही जानकारी ही इस तरह की साइबर ठगी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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