एमपी की EV पॉलिसी पर सवाल: वाहन बढ़े, लेकिन चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर अब भी पीछे
मध्य प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लागू की गई ईवी पॉलिसी का जमीनी असर अपेक्षा के अनुरूप दिखाई नहीं दे रहा है। प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या तेजी से बढ़कर करीब 1.99 लाख तक पहुंच गई है, लेकिन इनके लिए सार्वजनिक चार्जिंग सुविधाएं पर्याप्त नहीं हैं। वर्तमान में पूरे राज्य में केवल लगभग 1146 सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन उपलब्ध हैं, जिससे ईवी उपयोगकर्ताओं को लंबी दूरी की यात्रा और नियमित चार्जिंग में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
पॉलिसी के तहत भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर और उज्जैन को ईवी मॉडल सिटी के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन अब तक इस दिशा में उल्लेखनीय प्रगति नहीं हुई है। चार्जिंग स्टेशन की जानकारी देने के लिए प्रस्तावित मोबाइल एप और लाइव पोर्टल भी शुरू नहीं हो सके हैं। इसके अलावा, ईवी खरीद पर दी जाने वाली पंजीयन शुल्क छूट की अवधि समाप्त हो चुकी है, जिससे नए खरीदारों को मिलने वाला प्रोत्साहन भी कम हो गया है। रेट्रोफिटिंग यानी पुराने पेट्रोल-डीजल वाहनों को इलेक्ट्रिक वाहन में बदलने की योजना भी तकनीकी और संसाधन संबंधी कारणों से गति नहीं पकड़ सकी।
नीति में कई अन्य महत्वपूर्ण प्रावधान भी अब तक लागू नहीं हो पाए हैं। Madhya Pradesh EV Promotion Board का गठन नहीं हुआ है, जबकि इसका उद्देश्य विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित करना था। इंजीनियरिंग कॉलेजों और आईटीआई में ईवी से जुड़े विशेष पाठ्यक्रम शुरू करने की योजना भी अधूरी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि राज्य सरकार चार्जिंग नेटवर्क, डिजिटल सुविधाओं, कौशल विकास और प्रोत्साहन योजनाओं को तेजी से लागू नहीं करती, तो इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने की गति भविष्य में प्रभावित हो सकती है।