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ग्वालियर की लैंडफिल साइट शहर के लिए गंभीर पर्यावरणीय और स्वास्थ्य चुनौती बनती जा रही है। वर्षों से जमा पुराने कचरे के विशाल ढेर अब भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं, जबकि प्रतिदिन निकलने वाला नया कचरा लगातार इस बोझ को बढ़ा रहा है। स्थिति यह है कि लैंडफिल साइट और बुद्धा साइट पर लाखों टन पुराना कचरा जमा है, जिससे जगह-जगह आग लगने और जहरीला धुआं फैलने की घटनाएं सामने आ रही हैं। इससे आसपास रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका बढ़ गई है।
नगर निगम के अनुसार, शहर से रोजाना लगभग 550 टन ताजा कचरा लैंडफिल साइट पर पहुंच रहा है, लेकिन वर्तमान में उसका केवल सीमित हिस्सा ही प्रोसेस हो पा रहा है। पुराने कचरे के निपटारे का काम पहले एक निजी कंपनी को सौंपा गया था, लेकिन काम अधूरा रहने के कारण समस्या और जटिल हो गई। अब निगम उस कंपनी के खिलाफ कार्रवाई और ब्लैकलिस्ट करने की तैयारी कर रहा है। दूसरी ओर नई एजेंसी को पुराने और नए दोनों प्रकार के कचरे के वैज्ञानिक निपटान की जिम्मेदारी दी गई है।
नई व्यवस्था के तहत आधुनिक मशीनों की मदद से कचरे का पृथक्करण और निष्पादन किया जाएगा। कंपनी का दावा है कि आने वाले समय में प्रतिदिन बड़ी मात्रा में कचरे का प्रसंस्करण किया जाएगा और उससे आरडीएफ (रिफ्यूज डिराइव्ड फ्यूल) तैयार किया जाएगा, जिसका उपयोग उद्योगों में ईंधन के रूप में किया जा सकेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि सबसे पहले पुराने कचरे के पहाड़ को खत्म करना जरूरी है, ताकि जमीन खाली हो और लैंडफिल साइट को सुरक्षित तथा स्वच्छ बनाया जा सके।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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