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सरकारी विभागों पर 2123 करोड़ का बिजली बिल बकाया, आम उपभोक्ताओं पर बढ़ रहा बोझ
Government departments , electricity bills ,consumers is rising.

मध्यप्रदेश की बिजली वितरण कंपनियों पर सरकारी विभागों के 2123 करोड़ रुपये से अधिक के बकाया बिजली बिल का भारी दबाव है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास, नगरीय विकास, नर्मदा घाटी विकास, महिला एवं बाल विकास, स्कूल शिक्षा और स्वास्थ्य समेत 20 से अधिक विभागों ने वर्षों से बिजली बिल का भुगतान नहीं किया है। इनमें कई बकाया 10 से 15 साल पुराने बताए जा रहे हैं, जिनकी वसूली के लिए बिजली कंपनियां लगातार प्रयास कर रही हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस बकाया राशि से होने वाले वित्तीय नुकसान को बिजली कंपनियां अपने घाटे में शामिल करती हैं और इसी आधार पर बिजली दरों में बढ़ोतरी की मांग करती हैं। इसका सीधा असर प्रदेश के करीब दो करोड़ उपभोक्ताओं पर पड़ता है, जिन्हें महंगे बिजली बिल चुकाने पड़ते हैं। दूसरी ओर, आम उपभोक्ताओं के बिल बकाया होने पर कनेक्शन काट दिए जाते हैं, जबकि सरकारी विभागों के खिलाफ ऐसी सख्त कार्रवाई कम ही देखने को मिलती है।

ऊर्जा विभाग इस मुद्दे को मुख्यमंत्री के समक्ष भी रख चुका है और विभागों से बकाया वसूली के लिए नए प्रयास करने की बात कही गई है। आंकड़ों के अनुसार, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग पर सबसे अधिक 1230 करोड़ रुपये बकाया हैं, जबकि नगरीय विकास और अन्य बड़े विभागों पर भी करोड़ों रुपये की देनदारी है। ऐसे में समय पर वसूली और वित्तीय अनुशासन लागू करना बिजली कंपनियों की आर्थिक स्थिति सुधारने और आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ कम करने के लिए जरूरी माना जा रहा है।

Priyanshi Chaturvedi 19 June 2026

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