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ग्वालियर नगर निगम के आवारा कुत्तों की नसबंदी (ABC) प्रोजेक्ट में कथित घोटाले का मामला सामने आया है। आरोप है कि भुगतान प्राप्त करने के लिए एक पशु चिकित्सक ने दूसरे डॉक्टर के नाम से कूटरचित शपथ-पत्र (एफिडेविट) प्रस्तुत किया। नगर निगम के एबीसी प्रोजेक्ट के नोडल अधिकारी की शिकायत पर हुई जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद पड़ाव थाना पुलिस ने पशु चिकित्सक डॉ. रविरमन शर्मा के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। यह मामला वर्ष 2022 का है, लेकिन जांच पूरी होने के बाद अब एफआईआर दर्ज की गई है।
नगर निगम के अनुसार वर्ष 2022 में शहर में आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रित करने के लिए छत्तीसगढ़ की एनीमल केयर फाउंडेशन को जिम्मेदारी दी गई थी। संस्था ने दावा किया था कि 61 दिनों में 656 कुत्तों की नसबंदी की गई। जांच में सामने आया कि नगर निगम को सौंपे गए दस्तावेजों में पशु चिकित्सक के रूप में डॉ. राघव पाराशर का नाम दर्शाया गया, जबकि वास्तविक रूप से कार्य डॉ. रविरमन शर्मा द्वारा किया जा रहा था। आरोप है कि निगम प्रशासन को गुमराह कर भुगतान प्राप्त करने के उद्देश्य से यह फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत किया गया। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि कहीं इस मामले में नगर निगम के किसी अधिकारी या कर्मचारी की मिलीभगत तो नहीं थी।
इस तरह का मामला पहले भी मध्य प्रदेश के रतलाम नगर निगम में सामने आ चुका है। वहां कुत्तों की नसबंदी के नाम पर करोड़ों रुपये के भुगतान और अनियमितताओं के आरोप लगे थे। जांच में यह भी सामने आया था कि कई मामलों में एक ही कुत्ते की बार-बार नसबंदी दिखाकर भुगतान लिया गया। ग्वालियर का ताजा मामला सामने आने के बाद नगर निगम की ऐसी योजनाओं की निगरानी और पारदर्शिता को लेकर फिर सवाल खड़े हो गए हैं।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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