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छतरपुर जिले में विकास कार्यों की आड़ में मुरुम और मिट्टी के अवैध उत्खनन का बड़ा खेल सामने आया है। सड़क, रेलवे लाइन और हाईवे निर्माण के नाम पर सरकारी जमीन, गौचर भूमि और वन क्षेत्र से धड़ल्ले से खनन किया जा रहा है। खनिज विभाग और प्रशासन ने कई मामलों में लाखों रुपए का जुर्माना लगाया है, लेकिन इसके बावजूद अवैध उत्खनन रुकने का नाम नहीं ले रहा। ग्रामीणों का आरोप है कि बड़े ठेकेदारों और रसूखदार कंपनियों को संरक्षण मिल रहा है, जबकि छोटे वाहन चालकों पर ही कार्रवाई होती है। चंदला क्षेत्र में जीआरटीसी कंपनी पर 36.58 लाख रुपए की क्षति का मामला दर्ज किया गया, जहां बिना अनुमति हजारों घनमीटर मुरुम निकाले जाने का खुलासा हुआ। ग्रामीणों ने पेड़ों की कटाई और धूल से फसलों के नुकसान का भी आरोप लगाया है।
राजनगर और हरपालपुर क्षेत्र में भी रेलवे लाइन निर्माण के नाम पर बड़े पैमाने पर मिट्टी और मुरुम की अवैध खुदाई की शिकायतें सामने आई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कंपनियां वन भूमि और शासकीय जमीनों को भी नहीं छोड़ रहीं। टिकरी, सूरजपुरा और आसपास के इलाकों में प्रतिदिन सैकड़ों डंपर अवैध रूप से खनिज सामग्री ले जाते देखे जा रहे हैं। प्रशासनिक जांच और आदेशों के बावजूद जेसीबी और पोकलेन मशीनों का संचालन लगातार जारी है। लोगों का आरोप है कि अधिकारियों की मिलीभगत से यह पूरा नेटवर्क चल रहा है और पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचाया जा रहा है।
खैरों-कुर्रा मार्ग पर आरपीसी और बीएमसी कंपनियों द्वारा सड़क किनारे गहरी खदानें खोदने से हादसों का खतरा बढ़ गया है। हाल ही में हुए हादसे में दो ग्रामीण घायल हुए, जबकि दो गायों की मौत हो गई। ग्रामीणों का आरोप है कि विरोध करने पर कंपनी से जुड़े लोग हथियारों के दम पर धमकाते हैं और झूठे केस में फंसाने की धमकी देते हैं। खनिज विभाग का कहना है कि अवैध उत्खनन रोकने के लिए फिर से जांच कराई जाएगी, जुर्माना बढ़ाया जाएगा और मशीनें सील की जाएंगी। वहीं स्थानीय लोगों का सवाल है कि आखिर लाखों के जुर्माने और शिकायतों के बावजूद माफियाओं पर सख्त कार्रवाई कब होगी।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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