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काशी विश्वनाथ मंदिर में स्थापित हुई विश्व की प्रथम 'विक्रमादित्य वैदिक घड़ी'
काशी विश्वनाथ मंदिर में अब भारतीय कालगणना की अनूठी झलक देखने को मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर उज्जैन से आई विश्व की प्रथम 'विक्रमादित्य वैदिक घड़ी' को 4 अप्रैल, 2026 को विधिपूर्वक मंदिर परिसर में स्थापित किया गया। यह घड़ी न केवल समय बताने का साधन है, बल्कि भारतीय संस्कृति और वैज्ञानिक परंपरा का जीवंत प्रतीक भी है। उज्जैन से वाराणसी तक फैली इस पहल से देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में वैदिक समय की अद्भुत विरासत को आगे बढ़ाया जाएगा।
प्राचीन ज्ञान और आधुनिक तकनीक का अनोखा संगम
महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ, उज्जैन द्वारा विकसित यह घड़ी सूर्योदय और सूर्यास्त के अनुसार समय का सटीक आंकलन करती है और पूरे दिन को 30 मुहूर्तों में विभाजित करती है। इसके माध्यम से श्रद्धालु न केवल भारतीय मानक समय (IST) जान पाएंगे, बल्कि पंचांग, तिथि, योग, नक्षत्र, ग्रह गोचर और भद्रा जैसी सूक्ष्म जानकारियों से भी परिचित होंगे। यह घड़ी प्राचीन वैज्ञानिक सोच और डिजिटल तकनीक का अनोखा मिश्रण प्रस्तुत करती है।
सांस्कृतिक विरासत को युवाओं तक पहुँचाने का प्रयास
मध्यप्रदेश सरकार के नेतृत्व में यह पहल भारतीय सांस्कृतिक धरोहर को आधुनिक तकनीक के माध्यम से संरक्षित करने का अभिनव प्रयास है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 29 फरवरी, 2024 को उज्जैन में इस घड़ी का लोकार्पण किया था। अब काशी विश्वनाथ मंदिर में इसकी स्थापना से यह परंपरा और व्यापक रूप से लोगों तक पहुँच सकेगी। यह घड़ी युवाओं को अपनी जड़ों और भारतीय समय-संस्कृति की महानता से जोड़ने की प्रेरणा देती है।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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