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बुरहानपुर के गोकुल चंद्रमाजी मंदिर में बुधवार को फागुन उत्सव की रौनक देखने लायक थी। फूलों की बारिश और पारंपरिक फाग गीतों की मधुर गूंज से पूरा परिसर भक्तिरस में सराबोर हो गया। “फाग खेलन बरसाने आए हैं” और “मेरी चुनर में लग गयो दाग” जैसे गीतों ने उपस्थित श्रद्धालुओं के चेहरे पर मुस्कान और मन में उल्लास का जादू बिखेर दिया।
छैल-छबीली होली में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी और कार्यक्रम की शुरुआत फूलों की वर्षा के साथ हुई। मंच पर गोपियों और ग्वाल-बाल की झांकियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उत्सव का सबसे खास क्षण तब आया, जब भक्तों ने गुलाल और लड्डू उड़ाकर आपस में होली खेली, जिससे मंदिर परिसर हर तरफ रंग और उमंग से जगमगा उठा।
मंदिर प्रमुख हरिकृष्ण मुखियाजी ने बताया कि यह उत्सव बसंत पंचमी से होलिका दहन तक लगभग 40 दिनों तक मनाया जाता है। 500 साल पुरानी इस परंपरा में भक्त राधा-कृष्ण की भक्ति और ब्रजधाम की झलक का आनंद लेते हैं। कार्यक्रम के अंत में राल अर्पित कर होलिका दहन किया गया, जिससे मंदिर परिसर भक्तिमय और उत्सव के आनंद से भरपूर नजर आया।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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