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भोपाल लिटरेचर फेस्टिवल को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। विवाद इतना बढ़ा कि आयोजकों को एक सत्र को रद्द करना पड़ा। सवाल संस्कृति विभाग और राज्य सरकार की भूमिका पर भी उठ रहे हैं। पूरे देश में जहां शिक्षा, भारतीय ज्ञान परंपरा, सनातन संस्कृति और संस्कारों की बात की जा रही है, वहीं दूसरी ओर ऐसे विषयों पर सत्र आयोजित किए जाने को लेकर आपत्ति जताई जा रही है। विवादित सत्र बाबर से जुड़ी एक किताब पर चर्चा को लेकर था, जिसे लेकर सोशल मीडिया और बौद्धिक हलकों में नाराजगी देखने को मिली।
विवाद के बाद सत्र किया गया कैंसिल
जानकारी के मुताबिक, भारत भवन स्थित बहुकला केंद्र में भोपाल लिटरेचर फेस्टिवल के तहत एक सत्र आयोजित किया जाना था, जिसमें ‘बाबर : क्वेस्ट फॉर हिंदुइज्म’ किताब पर चर्चा होनी थी। यह सत्र 10 जनवरी को दोपहर करीब 1 बजे प्रस्तावित था, जिसमें आभास मालदहियार और यश दीक्षित के बीच संवाद होना था। लेकिन सत्र से पहले ही विवाद शुरू हो गया और आयोजकों को इसे रद्द करना पड़ा। हैरानी की बात यह है कि भारत भवन एक सरकारी संस्थान है और न्यास नियमों के अनुसार किसी निजी संस्था को भवन देने की अनुमति नहीं है। कुछ न्यासियों का कहना है कि उन्हें न तो आयोजन की शर्तों की जानकारी थी और न ही सत्र की विषयवस्तु की। ऐसे में प्रशासन और संस्कृति विभाग की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
Patrakar Vandana Singh
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