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सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों से जुड़े मामलों पर लगातार दूसरे दिन करीब ढाई घंटे तक सुनवाई हुई। इस दौरान जस्टिस नाथ ने कुत्तों के व्यवहार पर अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि कुत्ते इंसानों का डर पहचान लेते हैं, इसलिए काटते हैं। इस पर एक वकील ने असहमति जताई, लेकिन जस्टिस नाथ ने स्पष्ट किया कि यह बात वह अपने निजी अनुभव के आधार पर कह रहे हैं। वहीं याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को बताया कि राज्यों की ओर से दिए गए आंकड़ों में नगर पालिकाओं द्वारा संचालित शेल्टर की स्पष्ट जानकारी नहीं है और देश में फिलहाल केवल 5 सरकारी शेल्टर हैं, जिनमें प्रत्येक की क्षमता करीब 100 कुत्तों की है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने माना कि समस्या के समाधान के लिए ठोस इंफ्रास्ट्रक्चर जरूरी है। वकीलों ने दलील दी कि शेल्टर और मॉनिटरिंग की व्यवस्था के बिना कुत्तों को हटाना व्यावहारिक नहीं है। इससे पहले कोर्ट ने स्कूलों, अस्पतालों और रेलवे स्टेशनों जैसे सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने और उन्हें तय शेल्टर में भेजने के निर्देश दिए थे। वहीं एनिमल वेलफेयर पक्ष ने कुत्तों को हटाने से चूहों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई, जिस पर कोर्ट ने हल्के अंदाज में टिप्पणी करते हुए संतुलित और नियमों के अनुरूप समाधान पर जोर दिया।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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