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इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से मरने वालों की संख्या बढ़कर 18 हो गई है, जिससे हाई कोर्ट ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। कुलकर्णी भट्ठा की हरकुंवर बाई की 2 जनवरी को मौत के बाद प्रभावित परिवारों में रोष और भय का माहौल है, जबकि अलग-अलग अस्पतालों में अब भी करीब 15 मरीज आईसीयू में हैं। इंदौर खंडपीठ ने मामले से जुड़ी पांच जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए इसे सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल करार दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि स्वच्छ पेयजल का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन का मूल अधिकार है और सरकार, नगर निगम और संबंधित विभागों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। 15 जनवरी को अगली सुनवाई में मुख्य सचिव वर्चुअली उपस्थित होंगे और बताएंगे कि 6 जनवरी के आदेशों के पालन में क्या कदम उठाए गए।
कोर्ट ने प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल सरकारी खर्च पर टैंकर और पैक्ड वाटर से स्वच्छ पानी उपलब्ध कराने, दूषित स्रोतों का इस्तेमाल रोकने और स्वास्थ्य शिविर व मुफ्त इलाज सुनिश्चित करने के आदेश दिए हैं। साथ ही नई पाइपलाइन के टेंडर और 2017-18 की जल जांच रिपोर्ट पेश करने के निर्देश भी जारी किए गए हैं। कोर्ट ने इंदौर कमिश्नर, निगम आयुक्त, स्वास्थ्य अधिकारी और पीएचईडी के मुख्य अभियंता सहित सभी जिम्मेदार अधिकारियों को आदेशों के पालन में सख्ती बरतने को कहा। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि आवश्यकता पड़ने पर अधिकारियों के खिलाफ क्रिमिनल कार्रवाई की जा सकती है और पूरे मामले की निगरानी ऑनलाइन जल गुणवत्ता मॉनिटरिंग सिस्टम के जरिए की जाएगी।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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