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सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा कि मामला केवल काटने तक सीमित नहीं है, बल्कि सड़क पर दुर्घटनाओं का भी गंभीर खतरा है। कोर्ट ने सवाल उठाया कि “सुबह-सुबह कौन सा कुत्ता किस मूड में है, यह कोई कैसे पहचान सकता है?” सुनवाई में कुत्तों के मूड, काउंसलिंग, कम्युनिटी डॉग्स और इंस्टीट्यूशनलाइज्ड डॉग्स जैसे मुद्दे भी उठाए गए।
आवारा कुत्तों के पक्ष में पैरवी कर रहे वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि मंदिर और सार्वजनिक जगहों पर उन्हें नुकसान नहीं पहुंचा, और काटने वाले कुत्तों को पकड़कर नसबंदी के बाद उसी इलाके में छोड़ा जाएगा। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने मजाकिया अंदाज में कहा कि बस कुत्तों को काउंसलिंग देना बाकी रह गया है, ताकि वे वापस छोड़े जाने पर किसी को काट न सकें। यह मामला 28 जुलाई 2025 को संज्ञान में आया था और अब तक कुल पांच सुनवाई हो चुकी हैं।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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