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ओडिशा के कालाहांडी जिले में मक्का किसानों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। मंडी व्यवस्था न होने के कारण यहां के किसान मजबूरन अपना मक्का छत्तीसगढ़ के व्यापारियों को कम दाम पर बेचने को विवश हैं। जिले के अधिकांश ब्लॉक और पहाड़ी इलाकों में बड़े पैमाने पर मक्का उत्पादन होता है, लेकिन सरकारी खरीद केंद्र नहीं होने से व्यापारियों को मनमानी कीमत तय करने का पूरा मौका मिलता है। चार महीने की मेहनत और प्रति एकड़ लगभग 20 हजार रुपये खर्च करने के बावजूद किसानों को उचित लाभ नहीं मिल पाता, जिससे उनकी आर्थिक हालत लगातार बिगड़ती जा रही है।
धान और कपास के बाद कालाहांडी की दूसरी सबसे बड़ी फसल मक्का है, विशेषकर आदिवासी बहुल और जंगल से घिरे क्षेत्रों में इस खेती पर किसानों की जीविका निर्भर है। किसान उम्मीद करते हैं कि अच्छी फसल से उन्हें बेहतर आय मिलेगी, लेकिन हर साल बाजार सुविधा के अभाव में बिक्री प्रभावित होती है। केंद्र और राज्य सरकारों की योजनाओं के बावजूद स्थानीय स्तर पर मंडी स्थापित न होने से किसानों की समस्या जस की तस बनी है। इसका सीधा असर किसानों के आत्मनिर्भर बनने के सपने पर पड़ रहा है, जिससे मक्का उत्पादक किसान आज भी भारी परेशानी झेल रहे हैं।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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