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मध्यप्रदेश में आयुष्मान भारत योजना को और अधिक प्रभावशाली बनाने के लिए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक में सीएम ने कहा कि जहां निजी अस्पताल लगभग एक लाख रुपये में एक ऑपरेशन करते हैं, वहीं उसी राशि से यदि सरकारी अस्पताल में एक डॉक्टर नियुक्त किया जाए तो वह महीने में 8–10 ऑपरेशन कर सकता है। इससे न केवल इलाज की गुणवत्ता बढ़ेगी बल्कि सरकारी अस्पतालों की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी। बैठक में उप मुख्यमंत्री व स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला सहित शीर्ष अधिकारी मौजूद थे।
सरकार की सख्ती की जरूरत इसीलिए सामने आई है क्योंकि कई निजी अस्पतालों की लापरवाही और लाभ कमाने की मंशा के गंभीर मामले उजागर हुए हैं। एक घटना में भोपाल के निजी अस्पताल ने आयुष्मान राशि जारी न होने के कारण एक मृत मरीज को दिखावे के लिए वेंटिलेटर पर रखा और परिजनों से 40 हजार रुपये वसूले। वहीं बैतूल के अस्पताल में मरीज से 15 हजार रुपये लेने के बाद भी आयुष्मान से 30 हजार की राशि ली गई। ऐसे मामलों से साफ है कि आयुष्मान योजना का दुरुपयोग रोकने के लिए सरकारी अस्पतालों की भूमिका मजबूत करनी जरूरी है।
सीएम के निर्देशों के अनुसार, जब सरकारी अस्पताल अधिक सक्षम होंगे तो मरीजों की निजी अस्पतालों पर निर्भरता कम होगी। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को हाईटेक बनाया जाएगा और डॉक्टरों को बेहतर वेतन देकर उनकी संख्या बढ़ाई जाएगी। साथ ही, सरकार मेडिकल की पढ़ाई कर रहे बॉण्ड वाले छात्रों को प्रदेश में सेवा देने के लिए प्रोत्साहित करेगी। खासकर जनजातीय और दूरस्थ क्षेत्रों में सेवा देने वाले डॉक्टरों को अतिरिक्त मानदेय देने की योजना पर भी कार्य किया जा रहा है।
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