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भुज। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को स्पष्ट शब्दों में कहा कि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को सुरक्षित रखने के लिए घुसपैठियों को रोकना अनिवार्य है। इसके लिए देशवासियों को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया में पूरा सहयोग देना चाहिए।
गुजरात के भुज में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) की हीरक जयंती समारोह को संबोधित करते हुए गृहमंत्री शाह ने कहा कि राजनीतिक स्वार्थ के चलते एसआईआर का विरोध करने वाले दल देश के मतदाता सूची शुद्धिकरण अभियान को कमजोर कर रहे हैं, जबकि यह प्रक्रिया मजबूत लोकतंत्र की बुनियाद है।
शाह ने कहा कि देश से एक-एक घुसपैठिये को चुन-चुन कर बाहर निकाला जाएगा। बिहार की जनता के ताज़ा जनमत ने भी संदेश दे दिया है कि देशवासी घुसपैठियों को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस देश में प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री का चयन केवल भारत का नागरिक ही करेगा—किसी घुसपैठिये को लोकतांत्रिक व्यवस्था को दूषित करने का अधिकार नहीं है।
गृह मंत्री ने कहा कि एसआईआर प्रक्रिया लोकतंत्र को घुसपैठ से मुक्त करने का एक महत्वपूर्ण कदम है, इसलिए देश की जनता को इसमें सक्रिय रूप से सहयोग करना चाहिए। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि जो राजनीतिक दल इस प्रक्रिया का विरोध कर रहे हैं, वे देशहित के विपरीत काम कर रहे हैं, लेकिन सरकार अपने दृढ़ संकल्प से पीछे नहीं हटेगी।
अमित शाह ने कहा कि बीएसएफ ने पिछले छह वर्षों में अपनी दक्षता और वीरता से विश्व को संदेश दिया है कि भारत की सीमाएं पूरी तरह सुरक्षित हैं। उन्होंने बताया कि 2013 बीएसएफ जवानों ने अपने प्राणों की सर्वोच्च आहुति देकर देश की सीमाओं को सुरक्षित रखा है। आतंकवाद, नक्सलवाद, आपदा प्रबंधन और संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों में भी बीएसएफ ने हमेशा अग्रिम पंक्ति में काम किया है। उन्होंने कहा कि आज बीएसएफ 193 बटालियनों और 2.76 लाख से अधिक जवानों के साथ पाकिस्तान से सटी 2,279 किमी और बांग्लादेश से लगी 4,096 किमी लंबी सीमा की चौकसी कर रही है। शाह ने कहा कि जल, थल और गगन—तीनों क्षेत्रों की सुरक्षा में बीएसएफ का योगदान अद्वितीय है।
गृहमंत्री ने कच्छ की जनता के साहस को याद करते हुए कहा कि प्रतिकूल परिस्थितियों में भी इस क्षेत्र ने देश की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि कच्छ की जनता ने युद्धों और भूकंप जैसी कठिन परिस्थितियों से उबरते हुए क्षेत्र को विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है।
शाह ने हाल के आतंकवादी हमलों का उल्लेख करते हुए कहा कि पाकिस्तान प्रेरित आतंकवादियों ने पहलगाम में पर्यटकों पर कायराना हमला किया था। प्रधानमंत्री के निर्देश पर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाया गया, जिसमें जैश-ए-मोहम्मद, हिज्बुल मुजाहिदीन और लश्कर-ए-तैयबा के नौ प्रमुख ठिकानों को नष्ट किया गया। इस कार्रवाई के दौरान सब-इंस्पेक्टर मोहम्मद इम्तियाज अहमद और सिपाही दीपक ने सर्वोच्च बलिदान दिया, जिन्हें पूरा देश सदैव याद रखेगा।
गृहमंत्री ने कहा कि सुरक्षा बलों के पराक्रम के चलते देश 31 मार्च 2026 तक पूरी तरह नक्सलवाद से मुक्त हो जाएगा। उन्होंने बताया कि बीएसएफ ने छत्तीसगढ़ में 127 माओवादियों का आत्मसमर्पण कराया, 73 को गिरफ्तार किया और 22 को मार गिराया। उन्होंने कहा कि ‘तिरुपति से पशुपति’ तक फैलने के नक्सली सपने का अंत निश्चित है और उन क्षेत्रों में तेजी से विकास सुनिश्चित किया जाएगा।
शाह ने बताया कि वर्ष 2025 में अब तक बीएसएफ ने 18 हजार किलोग्राम से अधिक ड्रग्स जब्त किए हैं। इसे उन्होंने ऐतिहासिक उपलब्धि बताया और कहा कि देश को नशे के जाल से मुक्त करने में बीएसएफ की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
गृहमंत्री ने कहा कि सीमा पर अभेद्य फेंसिंग के अधिकांश ट्रायल पूरे हो चुके हैं और जल्द ही ‘ई-बॉर्डर सिक्योरिटी’ का कॉन्सेप्ट लागू किया जाएगा। अगले पांच वर्षों में पूरी भू-सीमा को ई-सुरक्षा के मजबूत घेरे में लाने का लक्ष्य है। उन्होंने बताया कि समुद्री सुरक्षा को सशक्त बनाने के लिए ओखा में देश की पहली नेशनल एकेडमी फॉर कोस्टल पुलिसिंग (एनएसीपी) स्थापित की गई है, जिसका संचालन बीएसएफ के हाथों में है।
शाह ने कहा कि जवानों के स्वास्थ्य, आवास और ड्यूटी घंटों में सुधार के लिए कई क्रांतिकारी कदम उठाए गए हैं। आने वाले दो वर्ष बीएसएफ के आधुनिकीकरण और जवानों के परिवारों के कल्याण को पूरी तरह समर्पित होंगे।
अमित शाह ने बताया कि समारोह में बीएसएफ के वीर जवानों को पुलिस मेडल फॉर गैलेंट्री (मरणोपरांत), आठ प्रेसिडेंट्स मेडल और कई ट्रॉफियां प्रदान की गईं। बल की हीरक जयंती के उपलक्ष्य में एक स्मारक डाक टिकट भी जारी किया गया। समारोह में गुजरात के उप मुख्यमंत्री हर्ष संघवी और बीएसएफ के महानिदेशक दलजीत सिंह चौधरी सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद थे।
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