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देश की राजनीति अब 'कांग्रेस मुक्त' की ओर
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लखनऊ/पटना। देश की राजनीति आज एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है,जहां कांग्रेस की भूमिका और भविष्य को लेकर बहस तेज हो गई है। बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों से यह तस्वीर और साफ दिख रही है। देश अब उस दिशा में बढ़ रहा है,जिसे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) वर्षों से राजनीतिक नारा मानकर दोहराती रही 'कांग्रेस-मुक्त भारत'।
 
भाजपा प्रवक्ता आनन्द दूबे ने कहा कि भारत का राजनीतिक परिदृश्य 2025 में जिस तेजी से बदल रहा है,उसने अब वैश्विक राजनीति के विशेषज्ञों का ध्यान भी अपनी ओर खींच लिया है। दुनिया की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक आबादी वाले देश में राष्ट्रीय दल कांग्रेस का लगातार सिकुड़ना और भाजपा का व्यापक उभार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अध्ययन का बड़ा विषय बन गया है। उन्होंने बताया कि वैश्विक थिंक-टैंक इसे 'भारत की राजनीतिक शक्ति में बदलाव' कह रहे हैं।
 
राजनीति शास्त्र के प्रोफेसर जगमीत बावा मानते हैं कि भारत में यह बदलाव किसी साधारण चुनावी परिणाम का मामला नहीं है,बल्कि एक सदी पुराने दल के क्षरण और एक नए राजनीतिक विचार की स्थायी स्थापना का ऐतिहासिक मोड़ है।
 
क्षेत्रीय दलों के लिए बोझ बना कांग्रेस का साथ
 
राजनीति के तमाम विश्लेषकों का एक ही निष्कर्ष है कि पिछले 10 वर्षों में कांग्रेस किसी भी गठबंधन को मजबूती नहीं दे पाई। उल्टा हाल यह हो गया कि जिन राज्यों में क्षेत्रीय दल कांग्रेस के साथ आए, वे दल अपने पारंपरिक वोटबैंक को बचाने में संघर्ष करने लगे। कई राज्यों में कांग्रेस का साथ लेना, किसी भी गठबंधन के लिए 'इलेक्टोरल रिस्क' साबित हुआ। बिहार चुनाव 2025 इसका ताजा उदाहरण है। महागठबंधन की सबसे कमजोर कड़ी कांग्रेस ही बनी और नतीजों में उसका प्रदर्शन बेहद खराब रहा।
 
भाजपा के बढ़ते प्रभुत्व से कांग्रेस का क्षरण तेज
 
वरिष्ठ पत्रकार लव कुमार मिश्र की मानें, तो भाजपा अब सिर्फ एक मजबूत पार्टी नहीं,बल्कि एक राष्ट्रीय राजनीतिक शक्ति के रूप में स्थापित हो चुकी है। हर चुनाव में भाजपा का नेतृत्व, संगठन और कैडर कांग्रेस से कोसों आगे दिखाई देता है। कांग्रेस के पास न मजबूत नेतृत्व, न स्पष्ट नैरेटिव और न ही जमीनी रणनीति है। तीनों की कमी ने उसे राष्ट्रीय राजनीति के हाशिये पर पहुंचा दिया है। उन्होंने कहा कि भाजपा का विकास, राष्ट्रवाद और हिंदुत्व मॉडल आज अधिकांश राज्यों में कांग्रेस के पारंपरिक वोटबैंक को भी अपनी ओर खींच चुका है।
 
देश कांग्रेस मुक्त राजनीति की ओर!
 
लव कुमार मिश्र ने कहा कि चुनावी आंकड़ों पर भरोसा करें, तो रुझान बिल्कुल साफ है। लगातार पराजय ने कांग्रेस को सिर्फ कमजोर नहीं किया, बल्कि कई राज्यों में उसे लगभग अप्रासंगिक भी बना दिया है। संगठनात्मक ढांचा टूट चुका है, युवा नेतृत्व नदारद है और पुराने नेताओं की पकड़ कमजोर हुई है। 2025 के बाद कांग्रेस एक राष्ट्रीय दल के बजाय धीरे-धीरे क्षेत्रीय-मानदंड वाली पार्टी बनने की ओर बढ़ती दिख रही है।
 
भारत की राजनीति में भाजपा का उभार
 
जनसंख्या के लिहाज से दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में भाजपा का मजबूत राजनीतिक प्रभुत्व अब वैश्विक थिंक-टैंकों के लिए एक नए राजनीतिक मॉडल के रूप में खड़ा हो रहा है। विशेषज्ञ बता रहे हैं कि भाजपा के नेतृत्व में भारत दीर्घकालिक वैचारिक सुदृढ़ीकरण के दौर से गुजर रहा है। भाजपा का संगठन कांग्रेस से 10 गुना अधिक सक्रिय है। नेतृत्व, नैरेटिव, कैडर, तकनीक, सोशल मीडिया हर स्तर पर बढ़त और हिंदुत्व, विकास तथा राष्ट्रवाद का सम्मिलित मॉडल अब अंतरराष्ट्रीय राजनीति के अध्ययन का विषय बन गया है।
 
कांग्रेस के पास न नेतृत्व, न रणनीति, न जन-आकर्षण
 
राजनीतिक विश्लेषक प्रोफेसर जगमीत बावा के अनुसार, तीन संकेत स्पष्ट हैं। उनका मानना है कि कांग्रेस के पास न नेतृत्व, न रणनीति, न जन-आकर्षण है। राजनीति में इतनी बड़ी पार्टी का बिना किसी मजबूत चेहरे के रह जाना 'अनुपम घटना' है। जिस पार्टी ने भारत को आजादी दिलाई,वही 10 करोड़ वोटर बेस खो चुकी है। यह दुनिया को चौंका रहा है। भारत में विपक्ष में कांग्रेस अब 'एसेट' नहीं, बल्कि 'लायबिलिटी' मानी जा रही है। यह बात राजनीति के लिए भी नया संकेत है।
 
'न्यू इंडिया मॉडल' पर दुनिया की नजर
 
जगमीत बावा ने बताया कि भारत आज वैश्विक भू-राजनीति, अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर तेजी से उभर रहा है। ऐसे में देश के भीतर कांग्रेस का पतन और भाजपा का अभूतपूर्व उभार दुनिया को एक स्पष्ट संकेत दे रहा है कि भारत एक स्थायी, विचार आधारित, नेतृत्व केंद्रित राजनीतिक मॉडल की ओर बढ़ रहा है। यह मॉडल आने वाले वर्षों में एशिया और अफ्रीका की कई लोकतांत्रिक राजनीति को प्रभावित कर सकता है।
 
Kolar News 16 November 2025

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