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रिटायरमेंट नहीं, यह अनुभव का स्वर्णकाल है
bhopal,  not retirement, golden age of experience

- अनुभव का थिंक-टैंक: रिटायर्ड अधिकारियों को सिस्टम से जोड़ने के हों प्रयास

(प्रवीण कक्कड़)

भारत राजनीति, व्यापार और सामाजिक नेतृत्व—तीनों ही क्षेत्रों में उम्र और अनुभव को सम्मान देता है। 60 वर्ष से अधिक आयु के नेता जब संसद में बोलते हैं तो उनकी बात दिशा बन जाती है। बड़े उद्योग अपने बोर्ड में अनुभवी लोगों को शामिल करते हैं, क्योंकि संकट की घड़ी में अनुभव ही सबसे विश्वसनीय सलाहकार होता है। समाज में भी वरिष्ठ नागरिक अपनी दृष्टि, अपनी स्मृति और अपनी जीवन-यात्रा से नई पीढ़ी को संभालने का काम करते हैं। लेकिन एक गहरी विडंबना है: पूरे देश में वही सम्मान और वही उपयोग पुलिस तथा प्रशासनिक सेवाओं के रिटायर्ड अधिकारियों को नहीं मिलता जबकि उनका अनुभव सबसे कठिन, सबसे जोखिमपूर्ण और सबसे व्यावहारिक होता है।

एक पुलिस अधिकारी 30–35 वर्षों तक अपराध के मनोविज्ञान को समझता है, भीड़ की नब्ज पहचानता है, संवेदनशील परिस्थितियों को शांत करता है, नक्सल क्षेत्रों में रणनीति बनाता है, सामाजिक संघर्षों को संभालता है, और हर तरह के अपराध के “ग्राउंड रियलिटी पैटर्न” को अपनी आँखों से देखता है। ये अनुभव किताबों में नहीं पढ़े जाते बल्कि फिल्ड में सीखे जाते हैं और उस अनुभव से युवाओं को प्रेरणा दी जाती है।

मध्य प्रदेश सहित देश के हर राज्य में ऐसे हज़ारों रिटायर्ड पुलिस अधिकारी हैं, जो आज भी ऊर्जा और विवेक से भरपूर हैं। पर रिटायरमेंट के साथ ही यह अमूल्य अनुभव एक तरह से “फाइल बंद” कर दिया जाता है। और यही वह राष्ट्रीय नुकसान है, जिसके समाधान पर अब गंभीरता से सोचना होगा। 

अनुभव की कीमत राजनीति और व्यापार समझते हैं, लेकिन पुलिस-प्रशासन क्यों नहीं? राजनीति में वरिष्ठ नेता मार्गदर्शक बनते हैं। कॉर्पोरेट जगत में अनुभवी लोग बोर्ड में शामिल होते हैं। लेकिन पुलिस और प्रशासन में जो नागरिक जीवन की सुरक्षा का संवेदनशील स्तंभ हैं वहीं रिटायर्ड अधिकारियों के अनुभव का व्यवस्थित उपयोग लगभग न के बराबर है। जबकि पुलिस सेवा में अनुभव की कोई बराबरी ही नहीं।

क्योंकि अपराधी कैसे सोचता है, दंगों में कौन सी गलती सबसे महँगी पड़ती है, आर्थिक अपराधों के पैटर्न क्या हैं, सायबर अपराधियों की मनोवृत्ति कैसे बदलती है, सामुदायिक पुलिसिंग में कौन-सी भाषा भरोसा बनाती है…यह सब केवल वही समझ सकता है जिसने इसे जिया है।

मध्य प्रदेश: एक राष्ट्रीय मॉडल बनने की क्षमता

मध्य प्रदेश भौगोलिक, सांस्कृतिक और प्रशासनिक रूप से बहुआयामी राज्य है। यहाँ शहरी अपराध भी हैं, ग्रामीण संवेदनशीलताएँ भी हैं, आदिवासी बेल्ट की विशिष्ट चुनौतियाँ भी हैं, और नक्सल क्षेत्रों का दबाव भी। ऐसे में रिटायर्ड पुलिस अधिकारियों के अनुभव का उपयोग न केवल ज़रूरी है, बल्कि नवाचार का अवसर भी है। राज्य अगर साहस दिखाए, तो यह मॉडल पूरे भारत के लिए मिसाल बन सकता है।

कहाँ-कहाँ रिटायर्ड अधिकारियों का अनुभव सोना साबित हो सकता है

1. पुलिस ट्रेनिंग सेंटरों में अतिथि विशेषज्ञ (Guest Faculty)

युवा भर्ती तकनीकी ज्ञान सीख लेते हैं, लेकिन जमीनी अनुभव नहीं मिलता।

रिटायर्ड डीएसपी, एसपी, DIG, IG, ADG यदि पढ़ाएँ—

•वास्तविक केस-स्टडी

•पूछताछ की कला

•क्राइम साइकोलॉजी

•भीड़ प्रबंधन

•महिला–बाल अपराध की संवेदनशीलता

•तो पुलिस फोर्स का स्तर कई गुना बढ़ सकता है।

2. जटिल अपराधों की जाँच में Special Expert Panels

हर ज़िले में 10–15 अनुभवी रिटायर्ड अधिकारियों का पैनल बनाया जाए:

•हत्या व संगठित अपराध

•साइबर फ्रॉड

•नाबालिग अपराध

•महिला अत्याचार

•क्रॉस-डिस्ट्रिक्ट गैंग पैटर्न

•अमेरिका, कनाडा, जापान में ऐसा दशकभर से चल रहा है। भारत में CBI/ED भी कई बार रिटायर्ड विशेषज्ञों की मदद लेती हैं। MP इसे जिला स्तर पर लागू कर सकता है।

3. सामुदायिक पुलिसिंग (Social Policing)

•विश्वास पुलिसिंग का सबसे बड़ा आधार है।

•रिटायर्ड अधिकारी यहाँ “सीनियर एडवाइज़र” बन सकते हैं—

•महिलाओं की सुरक्षा अभियान

•ड्रग डी-एडिक्शन प्रयास

•स्कूल–कॉलेज सेफ़्टी कमेटी

•साइबर अवेयरनेस

•ट्रैफिक एवं सामाजिक जागरूकता

•उनकी विश्वसनीयता जनता के मन में पुलिस के लिए सम्मान बढ़ाती है।

4. नीति निर्माण में Advisory Boards

रिटायर्ड IAS/IPS अधिकारियों को Policy Advisory Council में शामिल किया जाए। नीतियाँ तभी सफल होती हैं जब उनमें फील्ड अनुभव की खुशबू हो।

विश्व और भारत के सफल उदाहरण

जापान – Ko-ban Policing System

रिटायर्ड अधिकारी सामुदायिक पुलिसिंग के प्रशिक्षक हैं—

परिणाम: अपराध दर ऐतिहासिक स्तर तक कम।

सिंगापुर – Community Safety Ambassadors

रिटायर्ड विशेषज्ञ स्थानीय समुदाय की सुरक्षा रणनीति गाइड करते हैं—

परिणाम: दुनिया की सबसे सुरक्षित सोसायटी।

तमिलनाडु – पूर्व DGP के. विजय कुमार का मॉडल “ नक्सल समस्या से निपटने में सेवानिवृत्त अधिकारियों की रणनीतिक भूमिका बेहद सफल रही ।”

मध्य प्रदेश के लिए एक व्यवहारिक ब्लूप्रिंट

1. Retired Officers Resource Panel (RORP)

हर ज़िले में 10–20 विशेषज्ञ।

2. पुलिस ट्रेनिंग में Guest Faculty System

साप्ताहिक, मासिक सेशन।

3. District Expert Investigation Pool

जटिल और संवेदनशील मामलों में सक्रिय भूमिका।

4. Senior Citizen Advisory Force

सामाजिक पुलिसिंग और जनसंपर्क।

5. Policy Advisory Council (IPS/IAS Retired)

राज्यस्तरीय प्रशासनिक सुधार।

6. सम्मान एवं पुनर्स्थापन कार्यक्रम

“सेवा निवृत्त, अनुभव निवृत्त नहीं” का संदेश।

 

रिटायरमेंट किसी अधिकारी की क्षमता का अंत नहीं 

रिटायरमेंट किसी अधिकारी की क्षमता का अंत नहीं, बल्कि अनुभव की पराकाष्ठा है। जिस राष्ट्र ने अपने अनुभवी लोगों को सम्मान दिया, वही राष्ट्र आगे बढ़ा। मध्य प्रदेश यदि रिटायर्ड अधिकारियों को प्रणालीबद्ध भूमिका दे देता है, तो सिर्फ अपराध नियंत्रण नहीं—बल्कि शासन, प्रशिक्षण और समाज में एक नई संस्कृति विकसित होगी। एक अनुभवी अधिकारी की एक सही सलाह—एक बड़े संकट को रोक सकती है,  और भविष्य की पीढ़ियों को सुरक्षित बना सकती है।

Kolar News 16 November 2025

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