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चित्रकूट दीपोत्सव में उमड़ा श्रद्धा का सागर
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भोपाल । मध्य प्रदेश के सतना जिले के पवित्र तीर्थस्थल चित्रकूट में दीपावली के शुभ अवसर पर शुरू हुआ पांच दिवसीय दीपोत्सव इस बार पहले ही दिन धार्मिक उत्साह और भव्यता का अद्भुत संगम लेकर आया। शनिवार को दीपोत्सव के पहले दिन ही करीब चार लाख श्रद्धालुओं ने धर्मनगरी पहुंचकर भगवान की आराधना और कामदगिरि परिक्रमा का पुण्य लाभ लिया।
 
मंदाकिनी तट दीपों की जगमग रोशनी से आलोकित हो उठा, मानो स्वयं देवताओं ने धरती पर उतरकर इस अलौकिक दृश्य को निहारा हो। प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का रविवार को आगमन पूरे आयोजन का केंद्र रहेगा।

उल्‍लेखनीय है कि इस वर्ष का दीपोत्सव धार्मिक आस्था का केंद्र बनने के साथ ही प्रशासनिक दृष्टि से विशेष रूप से तैयारियों का उदाहरण पेश कर रहा है। कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पूरे मेले क्षेत्र को 11 जोनों में विभाजित किया गया है। प्रत्येक जोन में कार्यपालिक मजिस्ट्रेट और पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती की गई है, ताकि कहीं भी भीड़ प्रबंधन में कोई कठिनाई न हो।

एएसपी (ग्रामीण) प्रेमलाल कुर्वे के अनुसार मेले में लगभग डेढ़ हजार पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। वहीं, पहली बार चित्रकूट मेले के इतिहास में कमांड सेंटर की स्थापना की गई है, जहाँ से सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से हर पल की निगरानी की जा रही है। कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस और एसपी हंसराज सिंह ने स्वयं कमांड सेंटर से भीड़ प्रबंधन की स्थिति पर नजर रखी। उनके साथ अपर कलेक्टर विकास सिंह भी मौजूद हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज करेंगे कामदगिरि की परिक्रमा
दीपोत्सव के दूसरे दिन आज रविवार को प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का आगमन पूरे आयोजन का केंद्र रहेगा। कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री दोपहर तीन बजे चित्रकूट पहुंचेंगे। वे आरोग्यधाम में साधु-संतों के साथ भेंट कर चित्रकूट के समग्र विकास पर विचार-विमर्श करेंगे। इसके बाद वे पंचवटी घाट पर पहुंचकर दीपदान करेंगे और बच्चों को दीपावली उपहार भी देंगे। साधु-संतों के सम्मान के बाद मुख्यमंत्री आम जनता को संबोधित करेंगे। इसके बाद शाम पांच बजे वे सतना टाउन हॉल में आयोजित पूर्व विधायक स्वर्गीय शंकरलाल तिवारी की श्रद्धांजलि सभा में शामिल होंगे और तत्पश्चात भोपाल के लिए रवाना हो जाएंगे।

दशकों बाद चित्रकूट धाम में दिखी दिव्यता भव्यता
कई दशकों बाद चित्रकूट को इतनी भव्यता से सजाया गया है। मंदाकिनी के पवित्र तटों को अत्याधुनिक लाइटिंग और विजुअलाइजेशन सिस्टम से इस प्रकार सजाया गया है कि पूरा क्षेत्र दिव्य आभा से आलोकित प्रतीत हो रहा है। वहीं, कामदगिरि परिक्रमा मार्ग पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मार्गों की मरम्मत, रोशनी, पेयजल, प्राथमिक उपचार और विश्राम व्यवस्था को सुदृढ़ किया गया है। इस बार प्रशासन ने पर्यावरणीय संतुलन का विशेष ध्यान रखते हुए मिट्टी के दीयों और प्राकृतिक सजावट को प्राथमिकता दी है, जिससे न केवल परंपरा जीवित रहे बल्कि प्रकृति की रक्षा भी हो।

परंपरा और संस्कृति का भव्‍य मिलन देखने को मिल रहा
मेले के पहले दिन से ही चित्रकूट में भक्तिमय वातावरण व्याप्त हो गया है। मंदाकिनी के किनारे गूंजते भजन, आरती की घंटियाँ और जलते दीयों का प्रतिबिंब पानी में झिलमिलाते हुए ऐसा दृश्य उत्पन्न कर रहा है, जिसे शब्दों में पिरो पाना कठिन है। श्रद्धालु सुबह से ही भगवान कामतानाथ के दर्शन के लिए पंक्तिबद्ध दिखाई दिए। शाम होते-होते घाटों पर दीपों की पंक्तियाँ फैल गईं और पूरा क्षेत्र एक जीवंत चित्र की भाँति लगने लगा। इस अलौकिक दृश्य ने हर आगंतुक के मन में भक्ति की ज्योति प्रज्वलित कर दी।

25 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने का है अनुमान
इस बार के आयोजन में अनुमान है कि अगले पांच दिनों में लगभग 25 लाख श्रद्धालु देशभर से चित्रकूट पहुँचेंगे। इनमें उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड, महाराष्ट्र और राजस्थान से आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या सर्वाधिक रहेगी। मेले में धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ स्थानीय कारीगरों और व्यापारियों के लिए भी यह अवसर रोजगार और प्रदर्शन का बन गया है। हस्तशिल्प, मिठाई, खिलौनों और धार्मिक वस्तुओं की सैकड़ों दुकानें पूरे मेले में सजी हैं, जो पारंपरिक उत्सव को लोक संस्कृति का रंग दे रही हैं।

श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बनाई गईं नई व्यवस्थाएँ
प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए अस्थायी पार्किंग स्थल, फ्री शटल बस सेवा, और निःशुल्क पेयजल केंद्रों की व्यवस्था की है। स्वास्थ्य विभाग ने भी विभिन्न स्थानों पर प्राथमिक उपचार शिविर लगाए हैं ताकि किसी आकस्मिक स्थिति में तत्काल सहायता उपलब्ध कराई जा सके। इसके साथ ही साफ-सफाई और स्वच्छता पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है ताकि धार्मिक स्थल की गरिमा बनी रहे।

गौरतलब है कि चित्रकूट का यह दीपोत्सव केवल धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि संस्कृति, परंपरा और समरसता का प्रतीक बन गया है। यहाँ एक ओर जहाँ श्रद्धा की लौ जलती है, वहीं दूसरी ओर विकास और प्रबंधन का उजाला भी दिखाई देता है। मंदाकिनी के तट पर जगमगाते दीप और कामदगिरि की परिक्रमा करते श्रद्धालु मिलकर यह संदेश दे रहे हैं कि आस्था जब व्यवस्था के साथ जुड़ती है, तो वह केवल पर्व नहीं, बल्कि जन-जन का उत्सव बन जाती है। चित्रकूट का यह दीपोत्सव संस्कृति, लोक परंपरा और आधुनिक प्रबंधन का सुंदर संगम प्रस्तुत कर रहा है।

 

Kolar News 19 October 2025

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