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वाशिंगटन । अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीनी आयात पर अतिरिक्त 100 प्रतिशत टैरिफ (व्यापार शुल्क) लगाने की घोषणा की। यह पहली नवंबर से लागू होगा।
ट्रंप ने व्हाइट हाउस में संवाददाताओं से कहा, “चीन ने हमारे खिलाफ अनुचित प्रतिबंध लगाए हैं। अब हम 100 प्रतिशत शुल्क लगाकर जवाब देंगे। यह और पहले से मौजूदा शुल्कों के भी ऊपर होगा।” वर्तमान समय में चीनी आयात पर औसतन 40 प्रतिशत शुल्क लगता है जाे अब ट्रंप के अतिरिक्त शुल्क की घाेषणा के बाद बढ़कर 140 प्रतिशत हाे जाएगा।
इस बीच ट्रंप की इस घोषणा से स्टॉक मार्केट में भारी गिरावट आई और "डाउ जोन्स इंडेक्स" में 2 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। डाउ जाेन्स इंडेक्स एक स्टाक मार्केट इंडेक्स है जाे न्यूयार्क स्टाक एक्सचेंज और नास्डैक पर सूचीबद्ध 30 बड़ी सार्वजनिक रूप से ट्रेड की जाने वाली "ब्लू चिप" कपंनियाें के प्रदर्शन काे मांपता है।
ट्रंप प्रशासन के अनुसार, यह शुल्क चीन के सभी अमेरिका-बद्ध निर्यात पर लागू होगा, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी और महत्वपूर्ण सॉफ्टवेयर शामिल हैं। राष्ट्रपति ने साथ ही सभी महत्वपूर्ण सॉफ्टवेयर पर निर्यात नियंत्रण लगाने की बात कही। यह कदम 2018 से चल रहे अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध का हिस्सा हैं जब ट्रंप ने पहले 25 प्रतिशत शुल्क लगाए थे।
ट्रंप ने यह कदम चीन द्वारा दुर्लभ मिट्टी के खनिजों (रेर अर्थ मिनरल्स) पर निर्यात प्रतिबंध लगाने की जवाबी कार्रवाई के तहत उठाया है।
इस बीच विशेषज्ञों का मानना है कि इससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होगी। चैंबर ऑफ कॉमर्स के एक अधिकारी ने कहा, “यह उपभोक्ताओं पर बोझ डालेगा क्योंकि कीमतें बढ़ेंगी।”चीन ने राष्ट्रपति ट्रंप के इस कदम की आलाेचना करते हुए कहा कि वह इसकी बाबत उचित कदम उठाएगा। चीन ने दुर्लभ मृदा खनिजाें पर प्रतिबंध को आत्मरक्षा बताया, जो इलेक्ट्रिक वाहनों और रक्षा उद्योग के लिए आवश्यक हैं।
ट्रंप का यह कदम 2024 में उनके चुनाव अभियान की रणनीति से जाेड़कर देखा जा रहा है। उस दाैरान उन्होंने चीन पर कड़ा रुख अपनाया था। सूत्राें के अनुसार प्रश्न यह है कि क्या यह शुल्क स्थायी होगा या इस बाबत वार्ता का रास्ता खुलेगा। अर्थशास्त्री वॉरेन बफेट ने चेतावनी दी है कि इससे वैश्विक मंदी का खतरा बढ़ सकता है। इस बीच, यूरोपीय संघ और भारत जैसे देश सतर्क हैं। भारत ने कहा है कि वह अमेरिका के साथ समन्वय करेगा। ट्रंप की इस नवीन घोषणा के बाद सोने की कीमतें बढ़ गई है जबकि चीनी युआन कमजोर पड़ा है।
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