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जबलपुर । मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में ग्राम पंचायत सचिवों के बड़े पैमाने पर हुए तबादलों को लेकर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई है।
दरअसल, 13 जून 2025 को जिला पंचायत सीईओ ने 81 पंचायत सचिवों का तबादला किया था। नोटशीट वायरल होने पर पता चला कि इन तबादलों के पीछे स्थानीय विधायकों, सांसद, उपमुख्यमंत्री, नगर अध्यक्ष और यहां तक कि जिला अध्यक्ष तक की सिफारिशें दर्ज थीं। जबकि नियम को लेकर सवाल उठा कि जब ट्रांसफर नीति 2025 के तहत केवल प्रभारी मंत्री की स्वीकृति जरूरी है तो बाकी नेताओं की सिफारिश किस आधार पर मानी गई।
शहडोल निवासी दुर्गा प्रसाद तिवारी ने इस मामले पर जनहित याचिका लगाते हुए हाईकोर्ट तक पहुंचाया। उनकी ओर से अधिवक्ता भारत कुमार दुबे और सुनंदा केसरवानी ने दलील दी कि सिफारिश के आधार पर हुए तबादले गलत हैं और इससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता है। कोर्ट ने इस पर संज्ञान लिया।
कोर्ट ने नाराज़गी जताते हुए कहा कि जब विधायक, सांसद और पार्टी पदाधिकारी ही तबादले करा रहे हैं तो इन्हें ही प्रशासन में बैठा दो और यहां कोर्ट में भी बिठा दो। हाईकोर्ट ने इस आदेश पर फिलहाल रोक नहीं लगाई, लेकिन सरकार, शहडोल कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ से जवाब तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई 22 नवंबर को होगी, जिसमें सरकार को पूरे प्रकरण पर स्पष्टीकरण देना होगा।
उक्त नाराजगी न्यायालय की गत दिवस ही देखने को मिली है।
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