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नई दिल्ली । भारत ने पाकिस्तान के नेताओं को बयानबाजी में संयम बरतने की सलाह दी है। साथ ही चेतावनी दी कि पड़ोसी देश की ओर से किसी भी दुस्साहस के दर्दनाक परिणाम होंगे। हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर ने इसका स्पष्ट उदाहरण पेश किया है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक पत्रकार वार्ता में उक्त बातें कहीं। उन्होंने कहा कि हाल में भारत के खिलाफ पाकिस्तान के नेताओं ने लापरवाह, युद्धोन्मादी और घृणास्पद टिप्पणियां की हैं। अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए बार-बार भारत विरोधी बयान देना पाकिस्तानी नेतृत्व की आदत है।
प्रवक्ता ने कहा, “पाकिस्तान को अपनी बयानबाजी पर संयम बरतने की सलाह दी जाती है क्योंकि किसी भी दुस्साहस के दर्दनाक परिणाम होंगे जैसा कि हाल ही में प्रदर्शित किया गया था।” इसके अलावा भारत ने स्पष्ट किया कि सिंधु जल संधि पर मध्यस्थता न्यायालय की वैधता, औचित्य या क्षमता को भारत ने कभी स्वीकार नहीं किया है। ऐसे में इसके फैसले अधिकार क्षेत्र से बाहर और कानूनी प्रभाव से रहित हैं तथा भारत के जल उपयोग अधिकारों को प्रभावित नहीं करते।
जायसवाल ने पाकिस्तान के निर्णय संबंधी चुनिंदा और भ्रामक संदर्भों को भी खारिज किया। उन्होंने दोहराया कि 27 जून को स्पष्ट किया गया था कि सिंधु जल संधि भारत सरकार के संप्रभु निर्णय के तहत स्थगित है। यह निर्णय पाकिस्तान द्वारा सीमा पार आतंकवाद को लगातार प्रायोजित करने और बर्बर पहलगाम हमले के जवाब में लिया गया है।
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