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मुंबई । रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने बुधवार को वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद चालू वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भारत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर का अनुमान 6.50 फीसदी पर बरकरार रखा है। इसके साथ ही आरबीआई ने महंगाई दर का अनुमान 3.7 फीसदी से घटाकर 3.1 फीसदी कर दिया है।
आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने चालू वित्त वर्ष 2025-26 के लिए तीसरी द्विमासिक मौद्रिक नीति समीति (एमपीसी) की तीन दिवसीय समीक्षा बैठक के बाद कहा कि सामान्य से बेहतर दक्षिण और पश्चिम मानसून, कम मुद्रास्फीति, क्षमता इस्तेमाल में बढ़ोतरी और अनुकूल वित्तीय स्थितियां घरेलू आर्थिक गतिविधियों को समर्थन दे रही हैं। उन्होंने कहा कि इन सभी कारकों को ध्यान में रखते हुए वित्त वर्ष 2025-26 के लिए वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 6.5 फीसदी रहने का अनुमान है। आरबीआई गवर्नर ने पहली तिमाही में 6.5 फीसदी, दूसरी तिमाही में 6.7 फीसदी, तीसरी तिमाही में 6.6 फीसदी और चौथी तिमाही में 6.3 फीसदी जीडीपी रहने का अनुमान जताया है। इसके साथ ही उन्होंने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के लिए वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 6.6 फीसदी रहने का अनुमान जतायाा है। हालांकि, उन्होंने कहा कि जोखिम दोनों ओर समान रूप से संतुलित हैं।
आरबीई गवर्नर ने कहा कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) पर आधारित खुदरा महंगाई दर लगातार आठवें महीने गिरकर जून में 77 महीने के निचले स्तर 2.1 फीसदी पर आ गई। मुख्य रूप से खाद्य मुद्रास्फीति में भारी गिरावट से महंगाई दर नीचे आई है। उन्होंने कहा कि मजबूत सरकारी पूंजीगत व्यय सहित सहायक मौद्रिक, नियामकीय एवं राजकोषीय नीतियों से मांग में तेजी आने की उम्मीद है। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) पर आधारित महंगाई दर 3.1 फीसदी रहने का अनुमान है। दूसरी तिमाही में 2.1 फीसदी, तीसरी तिमाही में 3.1 फीसदी और चौथी तिमाही में 4.4 फीसदी रहने का अनुमान है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के लिए खुदरा महंगाई दर 4.9 फीसदी रहने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि 2025-26 के लिए मुद्रास्फीति का अनुमान जून में अपेक्षा से अधिक अनुकूल रहा है।
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