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कलियासोत नदी के 33 मीटर तक ग्रीन बेल्ट के दायरे में सर्वधर्म ए और बी सेक्टर में पक्के निर्माण वैध हैं। क्योंकि इनके निर्माण की अनुमति वर्ष 1995 से पहले हो चुकी थी। इस दौरान यहां मास्टर प्लान लागू नहीं था। नगर निगम की अपर आयुक्त मलिका निगम नागर ने 171 मामलों की सुनवाई पूरी कर अनुशंसा कमेटी के पास भेज दी है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) द्वारा गठित कमेटी अब अंतिम फैसला लेगी। कमेटी में टीएंडसीपी के ज्वाइंट डायरेक्टर, नगर निगम के चीफ सिटी प्लानर, एसडीएम, तहसीलदार शामिल हैं।
बता दें कि निगम ने सर्वधर्म एरिया में नदी के किनारे बने भवन मालिकों को नोटिस जारी कर भवन निर्माण से संबंधित दस्तावेज मांगे थे। इस पर रहवासियों ने जवाब दिए थे। सुनवाई के दौरान लोगों का कहना था कि उन पर ग्रीन बेल्ट का प्रावधान लागू नहीं होता, लिहाजा उनके निर्माण वैध हैं। अपर आयुक्त ने भी रहवासियों के पक्ष में अनुशंसा दी है।
कलियासोत नदी के ग्रीन बेल्ट पर अतिक्रमण मामले में याचिका की सुनवाई करते हुए एनजीटी ने अतिक्रमण हटाने के आदेश दिए थे। सीमांकन में नदी के ग्रीन बेल्ट के दायरे में सबसे अधिक निर्माण सर्वधर्म ए और बी सेक्टर में मिले थे। निगम ने इस पर नोटिस भेजकर जवाब मांगा था। रहवासियों ने एनजीटी में विशेष आवेदन लगाकर कहा था कि उन पर ग्रीन बेल्ट का नियम लागू नहीं होता। इस पर एनजीटी ने कमेटी बनाकर जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा था।
सर्वधर्म एरिया को छोड़कर सलैया के बीच करीब एक दर्जन हाउसिंग प्रोजेक्ट हैं। जिन्होंने नदी में बाउंड्रीवॉल बनाकर निर्माण किया है। जांच में सामने आया है कि कई जगह नदी को पूर दिया, लेकिन उस हिस्से में ठोस कार्रवाई नहीं हुई। कुछ बिल्डरों के फ्लैट भी ग्रीन बेल्ट के दायरे में थे लेकिन निगम और जिला प्रशासन ने नहीं तोड़ा।
सुभाशीष बैनर्जी, चीफ सिटी प्लानर का कहना है अपर आयुक्त ने अपनी अनुशंसा कमेटी को भेज दी है, अब एकाध सप्ताह में कमेटी की बैठक होनी है, जिसमें कलियासोत मामले में अंतिम फैसला होगा।
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