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महापौर आलोक शर्मा ने नगर निगम के इंजीनियरों को लेकर कमीशनखोरी की बात कही थी। अब कल यही बात मंत्री और दक्षिण-पश्चिम विधायक उमाशंकर गुप्ता ने भी कही। परिषद की आने वाली बैठक में एक बार फिर यह शब्द (कमीशनखोरी) गूंजेगा। महापौर का यह शब्द अधिकारियों को बड़ा नागवार गुजरा था।
नगर निगम परिषद की बैठक में सिटी इंजीनियर राजीव गोस्वामी को उनके मूल विभाग में भेजने का प्रस्ताव पारित किया गया, पर एक महीना हो गया वह निगम में ही हैं। अब अंदाजा लगाया जा सकता है कि नगर निगम परिषद के फैसलों का कितना पालन हो रहा है। यही कारण है कि निगम में नेताओं की बिल्कुल नहीं चल रही है, सिर्फ अफसरशाही हावी है।
महापौर आलोक शर्मा ने परिषद की बैठक में जनता से जुड़े कामों में देरी होने पर इंजीनियरिंग को लेकर कमीशनखोरी की बात कही थी और अफसरों को चेताया भी था।
मंत्री उमाशंकर गुप्ता एक सख्त महापौर भी रह चुके हैं। उन्होंने कल नगर निगम के कार्यक्रम में एक इंजीनियर से कहा था ‘तुम लोग ऐसा ही करते हो मैं सब जानता हूं, रिश्वत खाते हो, जहा से आए हो वहां भिजवा दूंगा’। उनकी इस बात के बाद अब आने वाली परिषद की बैठक् में यह मामला एक बार फिर उठ सकता है।
नगर निगम नेता प्रतिपक्ष मो. सगीर, कांग्रेस के सीनियर पार्षद अमित शर्मा, गिरीश शर्मा, गुड्डू चौहान आदि निे कहा कि कांग्रेस के पार्षद पहले ही चुके हैं कि निगम में जिस तरीके की अफसरशाही अभी चल रही और जनप्रतिनिधियों का अपमान हो रहा है, ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। परिषद की बैठक में कमीशनखोरी का मामला फिर उठाया जाएगा।
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