Advertisement
नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट की 75वीं वर्षगांठ के मौके पर 29 जुलाई से सुप्रीम कोर्ट में आयोजित विशेष लोक अदालत का शनिवार को समापन हुआ। इस मौके पर आयोजित समारोह में केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने शिरकत की। मेघवाल ने सुप्रीम कोर्ट के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि इस विशेष लोक अदालत में करीब एक हजार मामले निपटाए गए।
समारोह में मेघवाल ने कहा कि चीफ जस्टिस ने उन्हें जानकारी दी कि सुप्रीम कोर्ट में आयोजित इस लोक अदालत में लगभग एक हजार मामलों का निपटारा किया गया। उन्होंने कहा कि इस देश में पहली लोक अदालत भगवान कृष्ण ने लगाई थी। भगवान कृष्ण के प्रस्ताव को दुर्योधन ने नहीं माना तो समस्या हुई।
इस मौके पर चीफ जस्टिस ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट भले दिल्ली में हो लेकिन यह पूरे देश का है और मेरी कोशिश रही है कि रजिस्ट्री में देशभर के अधिकारी शामिल रहें। उन्होंने कहा कि लोक अदालत के मामलों के निपटारे के लिए हमने पैनल में दो जज और दो बार के सदस्यों को रखा। इसका मकसद यह था कि वकीलों का भी उचित प्रतिनिधित्व रहे। इस कार्यवाही में जजों और वकीलों को एक-दूसरे से समझने का मौका मिला।
चीफ जस्टिस ने कहा कि कई बार मुझसे पूछा जाता है कि सुप्रीम कोर्ट छोटे केस को भी इतनी अहमियत क्यों दे रहा है। इसका जवाब है कि डॉक्टर अंबेडकर जैसे संविधान निर्माताओं ने संविधान में अनुच्छेद 136 का प्रावधान किया, जिससे किसी के साथ अन्याय न होने पाए। उन्होंने कहा सुप्रीम कोर्ट की स्थापना का मकसद था कि वो जनता तक न्याय सुलभ हो सके। इसका मकसद यह नहीं था कि अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट की तर्ज पर 180 संवैधानिक मामलों का ही निपटारा करें बल्कि इसका मकसद लोगों तक न्याय की पहुंच सुनिश्चित करना और न्याय सबके द्वार पर है।
चीफ जस्टिस ने कहा कि लोक अदालत का मकसद है कि लोगों को इस बात का आभास हो कि जज भी उनकी जिन्दगी से जुड़े हैं। हम भले ही न्यायपालिका के शीर्ष पर हों फिर भी हम लोगों की जिंदगी से जुड़े हैं। लोगों को लगता होगा कि जज शाम चार बजे के बाद काम बंद कर देते हैं परन्तु ऐसा नहीं होता है। जज अगले दिन की फाइल पढ़ते हैं जबकि वीकेंड पर जज आराम न कर यात्रा कर रहे होते हैं ताकि समाज तक पहुंच सकें। चीफ जस्टिस ने कहा कि यह चिंता का विषय है कि कई बार लोग कानूनी प्रकिया से इतने परेशान हो जाते हैं कि वो किसी भी तरह का सेटलमेंट करके बस कोर्ट से दूर जाना चाहते हैं। चीफ जस्टिस ने यह भी बताया कि नालसा ने पिछले साल 8.1 करोड़ मुकदमों का निपटारा किया है।
इस कार्यक्रम के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कोरोना के दौरान अपने माता-पिता दोनों को खोने वाले 1065 छात्रों को छात्रवृत्ति प्रमाणपत्र सौंपे। इसके जरिए उन्हें चार साल तक हर साल 45 हजार रुपये मिलेंगे।
Kolar News
|
All Rights Reserved ©2025 Kolar News.
Created By:
Medha Innovation & Development |