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मध्यप्रदेश देश का ऐसा पहला राज्य बन गया है, जहाँ जेब पर अधिक बोझ डाले बिना मरीजों को अच्छा इलाज मिल रहा है। राज्य के शासकीय चिकित्सालयों में नि:शुल्क जाँच, उपचार, परिवहन और भर्ती मरीजों को नि:शुल्क आहार सुविधा मिल रही है। पिछले एक साल में राज्य के अस्पतालों की ओपीडी में 5 करोड़ और विभिन्न बीमारियों से ग्रस्त 52 लाख मरीजों ने भर्ती होकर स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लिया। मध्यप्रदेश को यह अवार्ड इंदौर में स्वास्थ्य नवाचारों पर चल रहे राष्ट्रीय सम्मेलन में दिया गया।
प्रदेश के चिकित्सालयों में वितरण के लिये 400 से अधिक प्रकार की दवाइयाँ उपलब्ध हैं। सर्वाधिक उपयोग में आने वाली जेनेरिक दवाएँ 24 घंटे चिकित्सालयों में नि:शुल्क उपलब्ध करवायी जा रही हैं। जिला चिकित्सालय में 48 प्रकार की, सिविल अस्पताल में 32, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में 16 और ग्राम आरोग्य केन्द्र में 5 प्रकार की नि:शुल्क जाँच की जा रही हैं। बीपीएल मरीजों को डायलिसिस सुविधा पूरी तरह नि:शुल्क और एपीएल मरीजों को मात्र 500 रुपये प्रति सत्र की दर पर दी जा रही है। वैसे इसके लिये रोगी को माह में लगभग 20-25 हजार तक व्यय करना पड़ता था। डायबिटीज मरीजों के लिये नि:शुल्क डायबिटीज क्लीनिक हैं। सभी जिलों में नि:शुल्क कैंसर उपचार और कीमोथैरेपी उपलब्ध है।
सभी जिलों में संजीवनी-108 एम्बुलेंस सेवा है। पाँच साल से पुराने एम्बुलेंस वाहनों को बदला जा रहा है। गर्भवती महिलाओं को अस्पताल ले जाने और प्रसूति के बाद वापस घर छोड़ने की नि:शुल्क परिवहन सुविधा है। साठ वर्ष से अधिक उम्र के मरीजों की नि:शुल्क जाँच और उपचार के लिये प्रत्येक जिले में जिरियाटिक वार्ड भी हैं। मानसिक रोगियों को 13 प्रकार की दवाइयाँ नि:शुल्क दी जा रही हैं। प्रतिदिन लगभग 30 हजार रोगियों को नाश्ता एवं दो समय का भोजन नि:शुल्क दिया जाता है। गंभीर बीमारी से ग्रस्त लोगों के लिये राज्य बीमारी सहायता-निधि, मुख्यमंत्री बाल ह्रदय उपचार योजना, बाल श्रवण योजना, दीनदयाल अंत्योदय योजना आदि हैं। क्षय रोगियों को नि:शुल्क निदान एवं उपचार सुविधा मिल रही है। नेत्र परीक्षण कर कमजोर दृष्टि वाले स्कूली बच्चों को नि:शुल्क चश्मे प्रदाय किये जाते हैं। गंभीर बीमारियों से ग्रस्त महिलाओं के लिये जिला चिकित्सालयों में रोशनी क्लीनिक की स्थापना की गयी है।
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