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कोलार के पार्षद कुम्भकर्णी नींद सो रहे हैं और अफसर लापरवाह बने हुए हैं। कोलार परियोजना के लिए कांट्रेक्टर ने 15 करोड़ की लागत से बनाई गई नई सड़कें खोद डाली। अब चिंता यह है कि आने वाली बारिश के पहले क्या ये सड़कें बन पाएंगी। क्योंकि अगर सड़कें नहीं बनीं तो यह बड़ी मुसीबत जनता के सामने खड़ी हो जाएगी।
पेयजल पाइपलाइन बिछाने के लिए ठेकेदार द्वारा वार्ड 80, 81, 82, 83 और 84 में काम किया जा रहा है। अब तक करीब 15 करोड़ की लागत से बनीं सड़कें खोदी जा चुकी हैं। खुदाई करके ठेकेदार उन्हें अव्यवस्थित करके छोड़ रहा है। ऐसे में ये सड़कें दोबारा व्यवस्थित कब होंगी, किसी को नहीं पता। इस मामले में नगर निगम के अफसर भी शांत बैठे हैं, वे भी जवाब नहीं दे पा रहे हैं कि दोबारा सड़कों को कब बनाया जाएगा। कुछ महीने बाद बारिश का सीजन आने वाला है। ऐसे में यदि बारिश के पहले ये सड़कें नहीं बनी, तो कोलार नगर पालिका और नगर निगम द्वारा खर्च किए गए 15 करोड़ रुपए की सड़कें खराब हो जाएंगी। नगर निगम के अफसरों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। कुछ जगह तो छह महीने पहले बनीं सड़कों तो बीच से खोद दिया गया है।
पाइपलाइन बिछाने के लिए ठेकेदार द्वारा कोई नियम नहीं माने जा रहे हैं। कहीं भी खुदाई कर रहे हैं। न कोई सूचना और न कोई बोर्ड। सड़कें खोदने के बाद पत्थर ही पत्थर चारों तरफ फेंक देते हैं। इससे आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। बच्चे और वाहन चालक पत्थरों से टकराकर गिर रहे हैं। कई जगह से बीच सड़क से ही खुदाई कर दी जा रही है। इस मामले में निगम अफसर कहीं भी मौके पर नहीं दिखाई देते कि क्या काम हो रहा है। इस संबंध में भी कोई भी निगम अफसर बोलने को तैयार नहीं है।सूत्रों के अनुसार ठेकेदार ने कुछ नेताओं को साध रखा है। इस कारण निगम अधिकारी जांच तो दूर ठेकेदार को लेकर कुछ भी बयान देने से बच रहे हैं।
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