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पिछले तीन महीने से कोलार,कलियासोत, केरवा, वाल्मी और बुलमदर फार्म से सटे जंगल में घूम रहे युवा बाघ टी-121 ने पहली बार बैल का शिकार किया है। तड़के करीब 4 बजे संस्कार वैली स्कूल के पास टी-121 ने शिकार किया है। अभी तक युवा बाघ छोटे मवेशियों का शिकार करता रहा है।
क्षेत्र के डिप्टी रेंजर आरबी शर्मा के मुताबिक तड़के क्षेत्र में बैल के शिकार की सूचना मिली थी। मौके पर पहुंचे तो एक बैल की बॉडी मिली, जिस पर बाघ के पंजे और नाखून के निशान हैं। आसपास पगमार्क भी मिले हैं। पगमार्क की जांच की गई तो यह क्षेत्र में घूम रहे युवा बाघ टी-121 के निकले। इस क्षेत्र में पिछले तीन महीने से बाघ का मूवमेंट है। उन्होंने कहा कि पहली बार बाघ ने बड़े मवेशी का शिकार किया है।
पिछले एक सप्ताह में राजधानी से सटे जंगल में बाघ व तेंदुए का मूवमेंट बढ़ा है। 27 जनवरी की दोपहर को 13 शटर गेट के पास एक तेंदुए ने नाला पार कर रही बकरी का शिकार किया था। 28 जनवरी की रात को बुलमदर फार्म के पीछे सेत करार गुफा के आसपास भी बाघ का मूवमेंट रहा था। फार्म के चौकीदारों के मुताबिक तार फेंसिंग नहीं होने के कारण बाघ आए दिन फार्म वाले हिस्से में पहुंच रहे हैं। लगातार जंगल से बाहर निकल रहे बाघ और तेंदुए के कारण आसपास क्षेत्र के लोगों में दहशत है।
युवा बाघ टी-121 ने जिस क्षेत्र में बैल का शिकार किया है उस क्षेत्र के आसपास कंजरवेटर फॉरेस्ट डॉ. एसपी तिवारी ने सुरक्षा के लिए नाकेदार और चौकीदारों की ड्यूटी लगा दी है। करीब 6 लोगों का स्टॉफ रात्रि के दौरान बाघ के मूवमेंट पर नजर रखेगा। वन विभाग ने ऐसा इसलिए है क्योंकि बाघ शिकार करने के दूसरे दिन बचे हुए शिकार को खाने वापस लौटते हैं। युवा बाघ के भी वापस लौटने की उम्मीद थी जिसके चलते नाकेदारा और चौकीदारों की ड्यूटी लगाई गई है।
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