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सुप्रीम कोर्ट के चौथे सबसे वरिष्ठ जज एमआर शाह 15 मई को रिटायर हो गए। रिटायरमेंट पर दिए गए विदाई समारोह में CJI डीवाई चंद्रचूड़ ने उनकी तारीफ की और शेर भी पढ़ा। रिटायर्ड जस्टिस शाह ने एक न्यूज वेबसाइट से CJI से जुड़ा एक किस्सा शेयर किया।जस्टिस शाह ने बताया कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट में टाइगर शाह नाम मिला था। यह नाम उन्हें CJI ने दिया था। यह CJI का उनके लिए प्यार और सम्मान करने का एक तरीका था। जस्टिस शाह बताया कि कुछ वर्ष पहले CJI और वो रूस में एक कॉन्फ्रेंस में शामिल होने गए थे। वहां CJI ने कहा था- कोई भी काम होगा, वो टाइगर को दूंगा और वो उस काम को कर देगा।जस्टिस शाह ने कहा कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट की किसी भी बेंच पर बैठने में कोई परेशानी नहीं हुई। उनका कभी भी किसी से विवाद नहीं रहा। उन्होंने कहा, "मैं गुजरात से आता हूं। हमारा नेचर जमीन से जुड़े रहने और दूसरों का सहयोग करने का है। जब मैंने सुप्रीम कोर्ट में करियर शुरू किया तो किसी ने कहा था कि मुकेश भाई! कहीं भी पहुंचो पर जमीन से हमेशा जुड़े रहना। मैंने हमेशा जमीन से जुड़े रहने की कोशिश की। पूरे करियर के दौरान ताकत का पर्दा मेरी आंखों पर नहीं पड़ा।"सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने जस्टिस शाह के विदाई समारोह में CJI ने कहा कि वह हर रोज सुबह जस्टिस शाह को टाइगर शाह कहते थे। उन्होंने शेर भी पढ़ा- आंख से दूर, दिल से कहां जाएगा। जाने वाले तू हमें बहुत याद आएगा। जस्टिस एमआर शाह बहुत परिश्रमी हैं। कोविड के समय भी उन्होंने ऐसा ही किया। जब हम लोग घर पर बैठे, गंभीर मुद्दों पर सुनवाई कर रहे होते थे, उस वक्त भी वह चैलेंज के लिए तैयार रहते थे।
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