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स्कूल शिक्षा विभाग सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को अपने क्षेत्र की संस्कृति, परम्परा और रीति-रिवाज से अवगत करवाने के लिये 'आसपास की खोज'' कार्यक्रम शुरू कर रहा है। इस संबंध में जिलों के डाइट प्राचार्य और परियोजना समन्वयक जिला शिक्षा केन्द्र को निर्देश जारी किये गये हैं। कार्यक्रम के लिये 51 जिले के 2966 शाला का चयन किया गया है।
'आसपास की खोज'' कार्यक्रम में बच्चों से प्रोजेक्ट तैयार करवाये जायेंगे। प्रोजेक्ट में देश की रक्षा में बलिदान देने वाले वीर महापुरुषों की जीवन-गाथा, क्षेत्र की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहर का महत्व, पॉलिथिन-मुक्त गाँव या शहर बनाने के लिये क्या प्रयास किये जा सकते हैं, को शामिल किया जायेगा। इसके अलावा संबंधित क्षेत्र में मनाये जाने वाले तीज-त्यौहार और उनकी मान्यताएँ, क्षेत्र में उगाई जाने वाली फसलें, आपदा के समय किये जाने वाले कार्य और क्षेत्र की लोक-संस्कृति, गाथाओं और कहावतों को भी प्रमुख रूप से शामिल किया जायेगा।
कार्यक्रम में शाला के प्रोजेक्ट कार्यों पर पुस्तिका का निर्माण भी करवाया जायेगा। संबंधित जिलों के शिक्षाधिकारियों से कहा गया है कि वे शाला-स्तर पर कक्षावार 6, 7 और 8 को विभाजित कर बच्चों के समूह बनाकर गतिविधियाँ करवायें।
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